बांदा। खेल में खेल की कहावत यहां चित्रकूटधाम मंडल मुख्यालय के स्पोर्ट्स स्टेडियम/खेल विभाग में हकीकत बन गई है। एक तरफ जहां खिलाड़ी प्रतिभाएं पैसे के अभाव में अपनी मेधा का प्रदर्शन नहीं कर पा रहीं, वहीं दूसरी ओर यहां जिला खेलकूद प्रोत्साहन समिति खिलाड़ियों को हतोत्साहित कर रही है।
तीन दशक से समिति का नवीनीकरण ही नहीं हुआ। हर साल लाखों रुपये का बजट समिति के खजाने में जमा रहता है। मौजूदा समय में भी 14.58 लाख रुपये समिति के खाते में डंप हैं।
केंद्र और राज्य सरकारें खेल और खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने के लिए योजनाएं और बजट दे रहीं, लेकिन चित्रकूटधाम मंडल में खिलाड़ियों को इसका लाभ नहीं मिल रहा। जिला खेलकूद प्रोत्साहन समिति सिर्फ कागजी बनकर रह गई है।
समिति का गठन वर्ष 80 के दशक में हुआ था। तब से अब तक सहायक रजिस्ट्रार फर्म सोसाइटीज एवं चिट्स, झांसी कार्यालय से इसका नवीनीकरण ही नहीं हुआ। जिला क्रीड़ाधिकारी का कहना है कि नवीनीकरण की कार्रवाई लंबित है।
यह जानकारियां आरटीआई में क्रीड़ाधिकारी द्वारा आरटीआई कार्यकर्ता कुलदीप शुक्ल को दी गई है। उधर, मार्च 2020 से स्टेडियम में सभी खेल हाकी, फुटबाल, कबड्डी, बास्केटबाल, क्रिकेट के प्रशिक्षण बंद चल रहे हैं। कोेच की भी नियुक्ति नहीं हुई है।
उधर, प्रोत्साहन समिति प्रभावी न होने से बुंदेलखंड की खेल प्रतिभाएं निखरने का मौका नहीं पा रहीं। समिति द्वारा कोई खेलकूद और प्रशिक्षण इत्यादि नहीं कराए जा रहे। समिति को हर वर्ष कई स्रोतों से मिलने वाला पैसा समिति के खाते में जमा होता जा रहा है। यह सिलसिला एक दशक से जारी है।
खेलकूद बंद, फिर भी 1.7 लाख खर्च
आरटीआई सूचना के अनुसार, जिला प्रोत्साहन समिति के खाते में वर्ष 2010-11 में 34 हजार 832 रुपये थे। साल दर साल यह रकम बढ़ती गई। हालांकि, कुछ खर्च भी दिखाए गए हैं।
मौजूदा समय में समिति के खाते में 14 लाख 58 हजार 265 रुपये जमा हैं। पिछले करीब डेढ़ वर्ष से कोरोना के चलते खेलकूद गतिविधियां और छात्रावास बंद है। इसके बावजूद पिछले वर्ष 2019-20 में समिति ने एक लाख 7 हजार 824 रुपये खर्च दर्शाया है।
सबसे ज्यादा 37,500 रुपये हाकी स्टिक की खरीद में भुगतान बताया गया है। 25000 रुपये नवीनीकरण शुल्क, 19,900 रुपये क्रिकेट नेट और 19,824 रुपये खिलाड़ियों की टी शर्ट में खर्च दिखाए गए हैं।