बांदा। कोतवाली व थाना से वेरिफिकेशन के बाद भी रिवेरिफिकेशन के लिए जमानतदारों को पुलिस कार्यालय व पुलिस लाइन बुलाकर उन्हें फोटो व हस्ताक्षर प्रमाणित करने के नाम पर घंटों बैठाए रखते हैं। जमानतदारों को खासी दिक्कतें हो रही है। पुलिस की इस नई व्यवस्था का वकील कड़ा विरोध कर रहे हैं।
जिला अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी जीतू का कहना है कि न्यायालयों से होने वाली 20 हजार से अधिक के अनुबंध पत्र की जमानतों में जमानतदारों के वेरिफिकेशन का प्राविधान है। ताकि फर्जी लोग जमानत न ले सके। सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के आदेश है कि पुलिस अधिकतम सात दिन के अंदर वेरिफिकेशन कर न्यायालय में भेजें। पुलिस जमानतदारों से पैसा ऐंठने के चक्कर में नए-नए नियम बनाकर उन्हें परेशान कर रही है। जमानतदारों के वेरिफिकेशन में देरी से समय पर जेल से मुल्जिम नहीं छूट पा रहे है।
पूर्व बार संघ अध्यक्ष शंकर सिंह का कहना है कि पहले थाने से जो वेरिफिकेशन होकर आ जाता था वह मान्य था। अब पुलिस ने रिवेरिफिकेशन की नई व्यवस्था शुरू कर दी है। इससे जमानतदारों को दिक्कत हो रही है। पूर्व बार संघ अध्यक्ष रामस्वरूप का कहना है कि पुलिस की रिवेरिफिकेशन की नई व्यवस्था विधि संगत नहीं हैं। इसे बंद होना चाहिए। इससे जमानतदारों का समय जाया हो रहा है। बार संघ महासचिव रामप्रकाश शिवहरे का कहना है कि रिवेरिफिकेशन की प्रक्रिया बिना किसी विधिक आदेश के अमल में लाई जा रही है। जमानतदारों का समय बर्बाद हो रहा है।
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हड़ताल पर रहे अधिवक्ता
बांदा। रिवेरिफिकेशन के विरोध में जिला अधिवक्ता संघ के आह्वान पर गुरुवार को वकील हड़ताल पर रहे। वकीलों ने न्यायालयों में कोई कामकाज नहीं किया। वादकारियों को न्यायालयों में अगली तारीखें मिलीं। बार संघ अध्यक्ष अशोक दीक्षित ने कहा कि पुलिस ने विधि विरुद्ध इस नई व्यवस्था को खत्म करना होगा। अन्यथा इसका विरोध जारी रहेगा।