फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Banda News: न तो कूडा उठा न ही खाद बनी, आरआरसी सेंटर हो गए कबाड़

Mon, 02 Mar 2026 11:43 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
विज्ञापन
फोटो- 15 खप्टिहागांव में बंद पड़ा आरआरसी सेंटर। संवाद
विज्ञापन
बांदा। स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण फेज-टू के तहत बनाए गए रिसोर्स रिकवरी सेंटरों (आरआरसी) की वर्तमान स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। लाखों रुपये की लागत से निर्मित ये केंद्र, संचालन में लापरवाही और अव्यवस्था के कारण अपने उद्देश्य को पूरा करने में विफल साबित हो रहे हैं। अधिकांश सेंटरों पर ताले लटके हैं, और जो कुछ खुले भी थे, वे भी कुछ ही दिनों में बंद हो गए। इससे गांवों में कूड़ा प्रबंधन और स्वच्छता की स्थिति जस की तस बनी हुई है।
विज्ञापन


सरकार की मंशा थी कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में रिसोर्स रिकवरी सेंटर स्थापित कर गांव में ही कूड़ा प्रबंधन किया जाए। इन सेंटरों का मुख्य उद्देश्य अपशिष्ट पदार्थों से वर्मी कंपोस्ट और जैविक खाद बनाना था। प्लास्टिक कचरे को बेचकर होने वाली आय से कर्मचारियों का मानदेय और ग्राम पंचायतों की आय बढ़ाने की भी योजना थी। इसके अतिरिक्त, गांव से कूड़ा कलेक्शन के लिए ई-रिक्शा भी खरीदे गए थे।
हालांकि, धरातल पर स्थिति बिल्कुल विपरीत है। जिले की 469 ग्राम पंचायतों में से 414 ग्राम पंचायतों में लगभग 25 से 41 करोड़ रुपये की लागत से आरआरसी सेंटरों का निर्माण कराया गया था। इसके बावजूद आज 90 फीसदी से अधिक आरआरसी सेंटरों में ताले लटके हुए हैं।
विज्ञापन

कूड़ा कलेक्शन के लिए खरीदे गए ई-रिक्शा या तो आरआरसी सेंटरों, सचिवालयों या फिर प्रधानों के घरों में धूल फांक रहे हैं। इससे गांवों में कूड़े का सही निस्तारण नहीं हो पा रहा है और ग्रामीण पहले की तरह गंदगी और नरकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। गांवों में महीनों तक सफाई नहीं होती, और यदि सफाई होती भी है, तो कूड़े का उठान नहीं किया जाता। जगह-जगह लगे कूड़े के ढेर इस अव्यवस्था का स्पष्ट प्रमाण हैं।


अधूरे निर्माण और कार्रवाई की चेतावनी
तिंदवारी ब्लॉक की कई मॉडल ग्राम पंचायतों जैसे लौहारी, अमलीकौर, छापर आदि में आरआरसी सेंटरों का निर्माण कार्य या तो शुरू ही नहीं हुआ है या फिर अधूरा पड़ा है। इस संबंध में खंड विकास अधिकारियों (बीडीओ) ने संबंधित सचिवों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और चेतावनी दी है कि यदि निर्माण कार्य शीघ्र पूरा नहीं किया गया तो उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
-

केस-1
ग्राम पंचायत खप्टिहा कलां में आरआरसी सेंटर बंद है। यहां पर कूड़ा कलेक्शन के लिए खरीदे गए तीन ई-रिक्शा प्रधान मैना देवी के आवास पर खड़े हैं। ग्रामीण अनिल, संतोष, मुकेंश, संदीप गोपी का कहना है कि महीनों साफ-सफाई नहीं होती है। कभी सफाई हुई भी तो कूड़े का उठान नहीं होता है।


केस-2

ग्राम पंचायत गडरिया में रिसोर्स रिकवरी सेंटर में ताला लटक रहा है। ई-रिक्शा आरसीसी सेंटर में ताले में बंद हैं। ग्रामीण शिवकरण, मइयादीन का कहना है कि शुरूआत में कुछ दिन रिक्शा चला इसके बाद बंद हो गया। गांव में पहले की तरह गंदगी ही गंदगी नजर आने लगी है।


वर्जन-

ग्राम पंचायतों में ई-रिक्शा चालकों को मानदेय देने के लिए कोई मद नहीं है। ग्रामीणों से कूड़ा लेने का माह में 20 रुपये लिया जाना था। ग्रामीणों ने रुपये दिए नहीं तो रिक्शा बंद हो गए। सचिवों से कहा गया कि वह रिक्शों का संचालन शुरू कराएं।
विज्ञापन

राजेंद्र कुमार, डीपीआरओ, बांदा

फोटो- 15 खप्टिहागांव में बंद पड़ा आरआरसी सेंटर। संवाद

फोटो- 15 खप्टिहागांव में बंद पड़ा आरआरसी सेंटर। संवाद

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें