फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बुंदेलखंड में अच्छी प्रजाति के उर्द व गेहूं के प्रसार की जरूरत

विज्ञापन
Need for spread of good varieties of urd and wheat in Bundelkhand - फोटो : BANDA
विज्ञापन
बांदा। बुंदेलखंड के कृषि विज्ञान केंद्र हाइटेक नर्सरी स्थापित करें। यहां पशुपालन में थारपारकर नस्ल की गायें उपयोगी है। कृषि विज्ञान केंद्र दीर्घकालीन अवधि के लिए रूपरेखा बनाकर कार्य करें। यह सुझाव कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरेंद्र प्रताप सिंह ने बुधवार को विश्वविद्यालय में प्रसार निदेशालय द्वारा आयोजित प्रसार परिषद की बैठक में दिए।
विज्ञापन

विश्वविद्यालय निदेशक (प्रसार) और परिषद सदस्य सचिव प्रो. एनके वाजपेयी ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्रों में प्रसार गतिविधियों के साथ 10 अलग शोध परियोजनाएं भी चल रही हैं। विज्ञान केंद्रों द्वारा 880 हेक्टेयर क्षेत्रफल में दलहन-तिलहन और 94.8 हेक्टेयर में अनाज व मोटे अनाज वाली फसलों में तकनीकी प्रसार किया गया है। निदेशक ने अन्य योजनाओं के बारे में भी बताया।
सदस्य डॉ. एसएस सिंह (रानी लक्ष्मीबाई विश्वविद्यालय, झांसी) ने कहा कि बुंदेलखंड में उर्द और गेहूं फसल चक्र काफी प्रचलित है। यहां इनकी अच्छी प्रजाति के प्रसार की जरूरत है। बुंदेलखंड की मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ कम हैं। इसे बढ़ाना जरूरी है।
विज्ञापन

सदस्य डॉ. ओम गुप्ता (पूर्व निदेशक, जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर) ने कहा कि युवाओं के लिए अल्प अवधि के रोजगार उन्मुंखी प्रशिक्षण शुरू किए जाने चाहिए। बैठक में बुंदेलखंड के सभी जिले के कृषक प्रतिनिधि विश्वविद्यालय अधिष्ठाता, विज्ञान केंद्र अध्यक्ष, विभागाध्यक्ष सहित सह निदेशक डॉ. आनंद सिंह, डॉ. पंकज कुमार ओझा भी मौजूद रहे। संचालन डॉ. नरेंद्र सिंह ने किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें