बांदा। पूर्व मंत्री व विधान परिषद सदस्य कांग्रेेसी नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने नागरिकता संशोधन कानून को भारतीय संविधान के विरुद्ध बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेेस इसका विरोध करती है। साथ ही यह भी कहा कि विरोध के आंदोलन हिंसक हरगिज नहीं होने चाहिए। सरकारी संपत्ति को नुकसान का मतलब अपना ही नुकसान है। पत्थरबाजी गैरकानूनी है।
दो दिवसीय भ्रमण पर आए पूर्व कैबिनेट मंत्री ने रविवार को अपने आवास पर आयोजित मीडिया वार्ता में कहा कि नागरिकता संशोधन कानून का विरोध भारत के हर वर्ग, जाति और धर्म के लोग कर रहे हैं। वे खुद और कांग्रेस इस काले कानून का शुरू से ही विरोध कर रहे है।
राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने सबसे पहले दिल्ली के इंडिया गेट पर हजारों कार्यकर्ता और आम लोगों के साथ धरना दिया। छात्र-छात्राओं पर हुए पुलिस जुल्म का विरोध किया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए ऐसे कानून ला रही है। इसका विरोध करने वालों पर धारा-144 की कार्रवाई भी दमनकारी नीति है।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने इस कानून का विरोध कर रहे लोगों से अपील की है कि धरना, प्रदर्शन, आंदोलन आदि उग्र या हिंसक नहीं होना चाहिए। सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना अपना ही नुकसान करना है। विरोध संविधान के दायरे में रहकर शांतिपूर्ण ढंग से करें।
उन्होंने कहा कि कुछ जगह यह भी देखा गया कि प्रदर्शनकारियों को उग्र होने के लिए पुलिस उकसा रही है। भीड़ में अक्सर चंद समाज विरोधी लोग मिल जाते हैं और पथराव करा देते है। दिल्ली जामिया मिलिया आदि में ऐसा ही हुआ। पुलिस को सूझबूझ से काम लेना चाहिए।
छात्रावासों में घुस कर निर्दोष छात्र-छात्राओं को पीटना या पकड़ना हरगिज उचित नहीं। इन सारे कामों से दुनिया में हमारी छवि धूमिल हो रही है। उन्होंने कहा कि यह काला कानून वापस न होने तक कांग्रेस अपने नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी के नेतृत्व में विरोध करती रहेगी। पत्रकार वार्ता में जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजेश दीक्षित, पूर्व चेयरमैन संजय गुप्ता, प्रदेश कांग्रेस सदस्य मुमताज अली, शहर काजी मौलाना मेराज मसूदी (अकील मियां) और मौलवी अमरूद्दीन आदि उपस्थित रहे।