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महानगरों से आने वाले खुले में फेंक रहे मॉस्क

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बांदा। लॉकडाउन के बाद देश के महानगरों से यहां वापस लौट रहे मजदूरों के मॉस्क से कोरोना संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है। वहां से मॉस्क लगाकर आए मजदूर यहां खुले में मॉस्क फेंक रहे हैं। इनके सुरक्षित निस्तारण का नगर पालिका, स्वास्थ्य विभाग या प्रशासन ने कोई इंतजाम नहीं किया।
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बड़ी संख्या में रोजाना महानगरों से पलायित मजदूर यहां लौट रहे हैं। इनमें ज्यादातर मॉस्क बांधकर आए हैं। आमतौर पर 24 घंटे में मॉस्क निष्प्रयोज्य हो जाता है। यह मजदूर अपना मॉस्क गांव, शहर या कहीं रास्ते में उतारकर फेंक रहे हैं। यह संक्रमण का सबसे बड़ा वाहक बन सकते हैं। आम राहगीरों से लेकर नगर पालिका के सफाई कर्मियों तक इस खतरे के दायरे में हैं।
उधर, नगर पालिका और स्वास्थ्य विभाग इसके सुरक्षित निस्तारण के बजाय सलाह परोस रहे हैं। ईओ संतोष कुमार मिश्र का कहना है कि उनके कूड़ेदान में फेंके गए मॉस्क शहर से बाहर जलवा दिए जाएंगे। सीएमओ डॉ. संतोष कुमार का कहना है कि ऐसे मॉस्क या कचरे का निस्तारण नगर पालिका की जिम्मेदारी है। मॉस्क में संक्रमण कई घंटे तक बना रहता है।
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23 बंदियों ने फोन पर लिया परिवार का हालचाल
बांदा। लॉकडाउन से जेल में बंदियों से मुलाकात बंद है। उन्हें परिजनों से बात करने के लिए जेल के पीसीओ फोन की सुविधा दी गई है। प्रभारी अधीक्षक आरके सिंह ने बताया कि जेल में 863 बंदी निरूद्ध हैं।
लॉकडाउन के बाद जेल में मुलाकात पर रोक लगा दी गई है। बताया कि दो दिन में 23 बंदियों ने जेल के पीसीओ के जरिए अपने परिजनों से बातचीत की। उधर, शासन के निर्देश पर अब 60 साल से अधिक उम्र के बंदियों की सूची तैयार की जा रही है। पहले विचाराधीन बंदियों सहित सात साल से कम सजा पाने वाले बंदियों की सूची तैयार कर शासन को भेजी गई थी।
दिल्ली में फंसे बेटों को पैसा न भेज सका पिता
बांदा। शहर के खुटला निवासी रामभरोसे के दो बेटे बंटी व सुरेश दिल्ली की एक कंपनी में काम करते हैं। लॉकडाउन के बाद कंपनी में ताला पड़ गया है। पिता को फोन पर सुरेश और बंटी ने अपनी बदहाली बयां की।
कहा कि कंपनी मालिक ने एक हजार रुपये देकर भगा दिया। अब दिल्ली में उनके लिए कहीं ठौर-ठिकाना नहीं है। पुलिस परेशान कर रही है। वह दिल्ली के पास एक गांव के बाहर पड़े हुए है। ग्रामीण उन्हें खाना पानी दे रहे है। रामभरोसे ने बताया कि दोनों पुत्रों के खाते में वह पैसा डालना चाहता था, लेकिन बैंक कर्मियों ने इनकार कर दिया।
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