बांदा। बिसंडा थाना क्षेत्र में दर्ज अपहरण और पॉक्सो एक्ट के दर्ज प्राथमिकी और युवती के न्यायालय में दिए गए बयानों के बीच अंतर सामने आया है। इसी आधार पर विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) की अदालत ने आरोपी लालबहादुर को जमानत दे दी।
अभियोजन के अनुसार 20 मार्च 2025 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि उसकी नाबालिग बेटी घर से बिना बताए चली गई है। खोजबीन के दौरान जानकारी मिली कि लालबहादुर उसे अगवाकर ले गया है। इसी आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अपहरण सहित अन्य धाराओं और पॉक्सो एक्ट में प्राथमिकी दर्ज की थी। वहीं, युवती ने दिए बयान में कहा कि उसने स्वयं लालबहादुर को फोन करके बुलाया था। दोनों हरियाणा गए और मंदिर में शादी कर ली।
इसके बाद पति-पत्नी की तरह साथ रहने लगे। युवती ने स्पष्ट कहा कि वह लालबहादुर से प्रेम करती है और उसके साथ ही रहना चाहती है। न्यायालय में दर्ज बयान में भी युवती अपने पहले बयान पर कायम रही। उसने कहा कि वह अपनी इच्छा से लालबहादुर के साथ गई थी। आरोपी ने उसके साथ कोई जबरदस्ती, धमकी या गलत काम नहीं किया।उसने अदालत से कहा कि वह अपने पति लालबहादुर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं चाहती।
सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह तथ्य भी आया कि युवती की उम्र को लेकर विरोधाभास है। प्राथमिकी में उसे नाबालिग बताया गया, जबकि एक्सरे रिपोर्ट में उसकी आयु लगभग 18 वर्ष आंकी गई। हालांकि विद्यालयी अभिलेखों में जन्मतिथि 29 मार्च 2011 दर्ज है। मामले के तथ्यों, युवती के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करते हुए अदालत ने आरोपी लालबहादुर को 75 हजार रुपये के निजी मुचलके और एक जमानतदार पर सशर्त जमानत दे दी।