बांदा। जश्ने रफीकी की कव्वाली महफिल में सूफियाना
कलामों पर अकीदतमंद झूम उठे। आगरा से आए सूफी और गद्दीनशीन मुबीनुद्दीन शाह
भी जमकर झूमे। कई जिलों से आई कव्वाल पार्टियों ने कलामों से समां बांध
दिया। अकीदतमंद भी कई जनपदों से आए हुए थे।
रविवार को सुबह कालवनगंज
स्थित मरगूब इलाही उर्फ शहजादे के आवास (शाह मंजिल) पर हजरत सूफी
रफीकुद्दीन शाह हसनी की याद में 7वां जश्ने रफीकी मनाया गया। सुबह
कुरानख्वानी, फातेहा व लंगर हुआ। रात में महफिले समां में कव्वालों ने कलाम
पेश किए।
कव्वाल अल्लानूर (आगरा) के कलाम- करबला का मंजर ये कह
रहा है, जो सिर नेजे पे है जीता हुुआ है, सराहा गया। कव्वाल वकील साबरी
(बांदा) और सगीर जहांगीरी (भीषमपुर) ने भी कलाम पेश किए। मेजबान मरगूब
इलाही और खादिम सूफी सिराज आलम उर्फ गुड्डन ने सभी का शुक्रिया अदा किया।
जमाल
शाह वारसी, अजमल शाह, अनीस, हसन, शकील (एटा), सूफी दिलनवाज (फिरोजाबाद),
सूफी शकील (कानपुर), मिंटू शुक्ला (हरियाणा), रऊफ रहमानी (मुंबई) शामिल
रहे। जश्न की सरपरस्ती खानकाहे कादरिया रफीकिया, आगरा के गद्दीनशीन सूफी
मोहम्मद मुबीनुद्दीन शाह ने की।