शेख अब्दुल कादिर जिलानी (गौसे आजम) का यौमे वफात (पुण्य तिथि) पर जुलूस-ए-गौसिया निकाला गया। घर-घर फातेहा ख्वानी के बीच इस्लामी कलेंडर के रबी उस्सानी माह की 11वीं तारीख को मनाई गई।
दोपहर बाद जुलूस-ए-गौसिया को कालवनगंज स्थित दरगाह खानकाह के पास हरी झंडी दिखाकर आयोजन कमेटी संरक्षक हाजी अहमद ने रवाना किया। शहर के कई इलाकों से होकर शाम को जुलूस कालवनगंज में खत्म हुआ। फातेहा हुई और तबर्रुक बांटा गया।
मेराजुल हसन, मेराज अहमद हशमती, बरकत अली, मौलाना शफीकुद्दीन, सैय्यद अख्तर, इमरान अली, इमत्याज अली शामिल रहे। गौसे आजम का पूरा नाम अल सैय्यद मुहीउद्दीन अबु मोहम्मद अब्दुल कादिर जिलानी था। वह इराक के जिलान नामक कसबे में 19 मार्च 1078 ईसवी को पैदा हुए।
उनकी वफात (देहांत) 12 जनवरी 1166 (इस्लामी कलेंडर के रबी उस्सानी माह की 11वीं तारीख) को हुई। उनके वालिद का नाम हजरत अबु स्वालेह मूसा अलहसनी और मां का नाम उम्मुलखैर फात्मा था। उन्होंने बचपन में डाकुओं को सदरी में छिपी 40 अशर्फियों की जानकारी देकर अपना मुरीद बना लिया था।
शहर काजी मौलाना मेराज मसूदी (अकील मियां) ने इस मौके पर बताया कि गौसुल आजम का कहना था मां ने नसीहत दी थी कि कभी किसी से झूठ न बोलना। उनकी सच्चाई से मुरीद बने डकैतों ने लूटा हुआ सामान लौटा दिया था।