बांदा। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की जनरथ बस सेवा जो कभी आरामदायक यात्रा का पर्याय मानी जाती थी, अब खटारा बसों के कारण यात्रियों के लिए सिरदर्द साबित हो रही है। लखनऊ से बांदा आ रही एक जनरथ बस के मऊ के पास खराब हो जाने से यात्रियों को भीषण गर्मी में घंटों इंतजार करना पड़ा। स्थिति इतनी विकट हो गई कि यात्रियों को सामान्य बसों से बांदा भेजा गया और यात्रियों को रिफंड भी नहीं दिया गया।
चित्रकूटधाम मंडल को वर्ष 2020 में आठ जनरथ (एसी) बसें मिली थीं। जिनमें से बांदा, महोबा और हमीरपुर को दो-दो बसें आवंटित की गई थीं। इन बसों का संचालन दिल्ली, लखनऊ, कानपुर, अयोध्या जैसे प्रमुख शहरों के लिए किया जाता है। हालांकि कुछ बसें 11 लाख किमी से अधिक का मानक पूरा कर चुकी हैं, जिससे उनकी हालत अत्यंत दयनीय हो गई है। तकनीकी खराबी के कारण इन बसों का बीच रास्ते में रुक जाना अब आम बात हो गई है, और वे कई दिनों तक वर्कशॉप में खड़ी रहती हैं।
इसे लेकर लखनऊ से बांदा आ रही जनरथ बस मऊ के पास खराब हो गई। दोपहर के समय, जब तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के आसपास था, यात्रियों को बस के ठीक होने का घंटों इंतजार करना पड़ा। इस दौरान, बस का एयर कंडीशनिंग (एसी) भी बंद था, जिससे यात्रियों को पसीने से तरबतर होना पड़ा। जब बस ठीक नहीं हुई तो कंडक्टर ने यात्रियों को सामान्य बसों में स्थानांतरित कर दिया। इस पूरी प्रक्रिया में यात्रियों को दो बजे बांदा पहुंचना था, लेकिन वे शाम छह बजे तक ही यहां पहुंच पाए।
यात्रीश्रुतिका ने बताया कि चालक ने बस को डेढ़ घंटे तक मऊ में रोके रखा और उसे ठीक करने का प्रयास करता रहा। रामू ने शिकायत की कि रिफंड करने के समय कंडक्टर कहीं चला गया। जिसके कारण कई यात्रियों को उनका रुपया वापस नहीं मिला।
इस बाबत प्रभारी क्षेत्रीय प्रबंधक रामलखन औलट ने कहा कि जनरथ बसों ने अभी तक किलोमीटर और साल का मानक पूरा नहीं किया है, इसलिए उन्हें कंडम घोषित नहीं किया जा सकता है। कहा कि बसें रोजाना डिपो से जांच कर निकलती हैं और तकनीकी खराबी पर किसी का जोर नहीं है। उन्होंने आश्वासन दिया कि शिकायत मिलने पर यात्रियों का रिफंड वापस कराया जाएगा।