बांदा। 15 साल के अंतराल में जिला सहकारी बैंक लिमिटेड की प्रबंध समिति में नियुक्तियों के नाम पर खेल हुआ है। उपकरण खरीद में लाखों का हेरफेर किया गया। शासन से आई जांच के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। फर्जीवाड़े की शिकायत सहकारिता मंत्री व मुख्यमंत्री पोर्टल में की गई थी। वहीं, सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर के बांदा आगमन पर कार्रवाई की चर्चा तेज हो गई है।
वर्ष 2008 से 2012 के बीच तत्कालीन बैंक प्रबंध समिति संचालकों के सगे छह रिश्तेदारों की वर्ग-4 में नियुक्ति की गई। इनमें सभी संचालकों के परिजन शामिल रहे। इसका खुलासा भी वर्ष 2017 में बैंक प्रबंध समिति ने कर दिया, लेकिन तत्कालीन उपायुक्त एवं उप निबंधक, चित्रकूटधाम मंडल ने इसको दबा दिया। इसकी शिकायत सात जून 2022 को अध्यक्ष डिस्ट्रिक्ट कोआपरेटिव बैंक सोसाइटी अखिलेश कुमार व सदस्य अरविंद कुमार ने संयुक्त हस्ताक्षर से अपर सचिव एनके सचिव को भेजी है। सचिव ने जांच के आदेश दिए हैं। अब पूरे प्रकरण की जांच सहायक आयुक्त राजेश कुमार कर रहे हैं।
खरीद में मिली गड़बड़ी
वर्ष 2009 से 2012 में जिला सहकारी बैंक लिमिटेड बांदा की 27 शाखाओं में तीन चरणों में टेली आई कैमरा, डीवीआर और मानीटर की खरीद में भी घोटाले की बात कही जा रही है। उपायुक्त एवं उप निबंधक सहकारिता, चित्रकूटधाम मंडल के आदेश पर वर्ष 2021 में अपर जिला सहकारी अधिकारी वीरेंद्र कुमार ने की। उन्होंने अपनी जांच आख्या में बांदा की 27 शाखाओं और मुख्यालय में कैमरा इंसटालेशन कराए जाने में 13 लाख 37 हजार 427 रुपये के गबन और 11 लाख 87 हजार 312 रुपये की वित्तीय अनियमितता का उल्लेख किया है। इस प्रकार कुल 25 लाख 24 हजार 739 रुपये की वित्तीय अनियमितता मिली है।
वर्जन
संचालक मंडल के प्रस्ताव और उप निबंधक के अनुमोदन पर उपकरण की खरीद की गई थी। यह खरीद क्रय एजेंसियों से की गई थी। उनके पास वित्तीय अधिकार नहीं हैं। वित्तीय अधिकार सचिव/महाप्रबंधक को होते हैं। बैंक में हर वर्ष आडिट होता है। गबन और वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत निराधार है।
सुशील द्विवेदी
संचालक डिस्ट्रिक कोआपरेटिव, बैंक, बांदा।