बांदा। प्रदेश और खासकर बुंदेलखंड में हरित क्रांति की सरकारी स्तर पर चल रही खर्चीली योजनाओं में वन विभाग की भूमि पर अवैध कब्जे बड़ा रोड़ा बने हैं। एंटी भूमाफिया जैसे कानून भी इन पर अंकुश नहीं लगा पा रहे हैं। बुंदेलखंड के सातों जिलों की 494.43 हेक्टेयर वन भूमि पर अतिक्रमण/अवैध कब्जे हैं।
अरबों रुपये की इस कीमती भूमि पर 226 लोगों ने अतिक्रमण कर रखा है। वन विभाग मात्र 52 मामलों को ही अदालत ले जा पाया है। प्रदेश में 25,778 हेक्टेयर भूमि पर अवैध कब्जे हैं। 1910 कब्जों का प्रकरण अदालत में चल रहा है। यह खुलासा आरटीआई में प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय से हुआ है।
बुंदेलखंड में तेजी से गड़बड़ाते पर्यावरण संतुलन को दुरुस्त करने के लिए एनजीटी से लेकर सरकारें तक पौधरोपण पर जोर दे रही हैं। हर वर्ष करोड़ों रुपये पौधरोपण अभियान में खर्च किए जा रहे हैं। वन भूमि का दायरा मानक के मुताबिक किए जाने की कवायदें चल रही हैं। इसके बाद भी वन भूमि का दायरा बढ़ना तो दूर सिकुड़ता जा रहा है।
इसमें अवैध कब्जों की अहम भूमिका है। वन विभाग ने खुद स्वीकारा है कि बुंदेलखंड के सातों जिलों में 494.43 हेक्टेयर वन भूमि पर अवैध कब्जे/अतिक्रमण है। पर्यावरण कार्यकर्ता और आरटीआई कार्यकर्ता आशीष सागर दीक्षित ने इसकी सूचना मांगी थी। प्रदेश के वन विभागाध्यक्ष/वन संरक्षक कार्यालय से दी गई सूचना में बताया गया है कि चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों में 91.510 हेक्टेयर वन भूमि पर अवैध कब्जे हैं। यहां 25 मामले न्यायालय में दाखिल हैं। इसी तरह झांसी मंडल में 402.920 हेक्टेयर भूमि में अतिक्रमण है। यहां 126 लोगों ने कब्जे कर रखे हैं। न्यायालय में सिर्फ 27 मामले दाखिल किए गए हैं।
जनपद अतिक्रमण मामले न्यायालय में
बांदा 00 00 00
हमीरपुर 16.829 15 15
महोबा 74.534 08 08
चित्रकूट 0.147 02 02
जालौन 46.510 00 23
झांसी 39.350 02 06
ललितपुर 317.060 25 97
योग 494.43 52 226
बुंदेलखंड में जिलेवार वन क्षेत्र का प्रतिशत
जिला वन क्षेत्र (प्रतिशत)
बांदा 1.21
चित्रकूट 21.8
हमीरपुर 3.6
महोबा 5.45
जालौन 5.6
झांसी 6.66
ललितपुर 7.8
प्रदेश की स्थिति
- कुल अतिक्रमण- 25,728 हेक्टेयर
- खाली कराए गए- 89.454 हेक्टेयर
- अतिक्रमण के मामले- 18,390
- अदालत में लंबित- 1910 केस
- अदालती केसों की भूमि का क्षेत्रफल- 12,384 हेक्टेयर
वन विभाग की लाचारी, भू-माफिया भारी
बांदा। पर्यावरण कार्यकर्ता व आरटीआई कार्यकर्ता आशीष सागर दीक्षित का कहना है कि वन विभाग की लाचारी या लापरवाही और भूमि माफियाओं के रसूख का ही नतीजा है कि उत्तर प्रदेश के किसी भी जिले में मानक के मुताबिक वन भूमि नहीं है। वन क्षेत्र बढ़ने के बजाय तेजी से सिमट रहे हैं। वन भूमि पर कब्जा करने वालों में दबंग और भूमाफियाओं के साथ कुछ सरकारी और अर्ध सरकारी संस्थाएं भी हैं। अदालतों में चल रहे मामलों की प्रभावी पैरवी नहीं की जा रही। यही वजह है कि बुंदेलखंड में वन विभाग एक भी अतिक्रमण नहीं हटवा सका।