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हिट एंड रन: थमे रहे ट्रकों व निजी बसों के पहिए, तीन करोड़ का नुकसान

Tue, 02 Jan 2024 10:52 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
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बांदा। हिट एंड रन कानून का विरोध जोर पकड़ता जा रहा है। मंगलवार को दूसरे दिन भी ट्रकों और निजी बसों के पहिए जाम रहे। इससे करीब तीन करोड़ के नुकसान की आशंका जताई गई है। निजी बसों के न चलने से छोटी-छोटी दूरी जैसे अतर्रा, बिसंडा, कालिंजर, जसपुरा, मौदहा, पन्ना तक आवागमन करने वालों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। निजी बस चालकों ने नए कानून के विरोध में स्टैंड के बाहर नारेबाजी भी की। दूसरी ओर, दोपहर तक रोडवेज बसों के भी पहिए थमे रहे। अधिकारियों ने जब चालकों को चेताया, तब जाकर बसों ने रूटों पर दौड़ना शुरू किया।
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मंगलवार सुबह रोडवेज की लंबी दूरी जैसे दिल्ली, कानपुर व लखनऊ की बसें तो रवाना की गई, लेकिन छोटे रूटों की बसें नहीं चल रही थी। यह स्थिति सुबह 11 बजे तक रही। इससे फतेहपुर, चित्रकूट के लिए जाने वाले यात्री इधर, उधर भटकते रहे। जानकारी पर रोडवेज के अधिकारी बस स्टैंड पहुंचे और चालकों को कार्रवाई की चेतावनी दी। तब जाकर दोपहर 12 बजे के बाद से बसों का संचालन सामान्य हो सका।



- विरोध में लगाया जाम, पर्यटक भी फंसे
नरैनी। निजी बस चालकों ने चित्रकूट-खजुराहो राज्य मार्ग पर ट्रकों को खड़ा कर जाम लगा दिया। जाम लगभग आधा घंटे तक लगा रहा। पुलिस के पहुंचने के बाद जाम खुल गया। घटना से कस्बा के मुख्य चौराहे के बांदा, अतर्रा, कालिंजर, व करतल मार्ग पर भारी वाहनों का आवागमन बाधित रहा। बांदा की ओर से आ रहे डंपर चालक की भीड़ ने पिटाई कर दी। एक विदेशी सैलानियों की गाड़ी भी इस जाम में फंस गई। इससे पर्यटकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
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- सन्नाटे में डूबा रहा बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे
ट्रकों की आवा जाही न होने से बांदाृ-बहराइच और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर पूरे दिन सन्नाटा रहा। टोल से भी गिने चुने वाहन ही गुजरे। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के टोल 54 के प्रबंधक भारत पंजाबी ने बताया कि एक जनवरी के पहले प्रतिदिन कम से कम 100 भारी वाहन तो गुजरते ही थे, लेकिन दो दिनों से इक्का-दुक्का वाहन ही गुजरे हैं। इससे राजस्व का नुकसान हुआ है।

- सर्दी में भटकने को मजबूर हुए यात्री
सुबह छोटी दूरी की रोडवेज बसें और निजी बसें बिल्कुल भी न चलने से यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। फतेहपुर जाने के लिए परेशान दिनेश कुमार ने बताया कि उन्हें नहीं मालूम था कि बसें नहीं चल रही है। कालिंजर के लिए निकले मिथलेश का कहना था कि उन्हें अब मजबूरन बाइक से जाना पड़ेगा।

- मदद का मतलब मौत मोल लेना है
आंदोलन का समर्थन करते ट्रक चालक सुमेर सिंह और रोडवेज के चालक अरविंद का कहना है कि भगवान न करे कभी उनकी गाड़ी से कोई हादसा हो, यदि हो भी गया तो मदद के लिए स्टेयरिंग से उतरने पर भीड़ उनकी पिटाई कर जान भी ले सकती है। उनकी सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा।

परिवहन आयुक्त ने जारी किया पत्र
आंदोलन को देखते हुए मंगलवार को परिवहन आयुक्त ने पत्र जारी कर रोडवेज और एआरटीओ दफ्तर के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे चालकों व ऑपरेटरों के साथ बैठक कर उन्हें समझाएं कि अभी कानून लागू नहीं हुआ है, लिहाजा हड़ताल का कोई औचित्य नहीं है। एआरटीओ शंकर सिंह ने बताया कि चालक-परिचालकों को समझाने का काम शुरू कर दिया गया है।



रास्तों में फंसे तेल के टैंकर, पेट्रोल पंपों पर भीड़
बांदा। ट्रक व प्राइवेट बसों की हड़ताल के कारण जगह-जगह पर पेट्रोल डीजल लेकर आ रहे टैंकरों को प्रदर्शनकारियों ने रोक लिया है। जिससे तेल से भरे टैंकर समय से नहीं आ पा रहे है। उधर, नए वर्ष के कारण सोमवार को पेट्रोल की अधिक खपत हो जाने से जिले के एक दर्जन से अधिक पेट्रोलपंप रिजर्व की स्थिति में पहुंच गए है। उनका कहना है कि मंगलवार को टैंकर नहीं आए तो तेल की किल्लत हो सकती है।
पेट्रोलपंप डीलर्स एसोसिएशन के सचिव प्रभाकर का कहना है कि जिले में 54 पेट्रोलपंप है। सभी पेट्रोलपंप हमेशा दो से तीन दिन का स्टाॅक एडवांस लेकर चलते है। 40 से अधिक पेट्रोलपंपों में पर्याप्त तेल उपलब्ध है। शासन के सख्त आदेशों के बाद जहां जहां फंसे टैंकरों को प्रशासन किसी तरह भेज रहा है। मंगलवार को कई टैंकर यहां आए है।



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गैस व तेल का स्टोर बढ़ा


हिट एंड रन कानून में संशोधन के विरोध में ट्रक व बसों की हड़ताल से भयभीत लोग रसोई गैस व पेट्रोल का स्टोर करने लगे है। मंगलवार को पेट्रोलं पपों में कई लोगों ने गाड़ियों की पूरी की पूरी टंकी भरा ली। बोल कही पेट्रोल की किल्लत न हो जाए। उधर, तमाम लोग घरों के खाली गैस सिलिंडरों को भराने की दौड़ लगाने लगे है। लेकिन सोमवार को कई एजेंसियों के ट्रक गैस सिलिंडर लेकर नहीं आए है।
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