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बांदा: घास, बांस ने बचा दी जेल प्रशासन की फांस

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बांदा। हाई सिक्योरिटी जेल से भाग निकला बंदी विजय आरख 22 घंटे बाद कृषि फार्म में घास के बीच भले ही मिल गया हो, लेकिन जेल प्रशासन की इस सफलता में पेच ही पेच हैं। खास बात यह है कि बंदी की तलाश में जेल कर्मियों ने कारागार सहित कृषि फार्म का चप्पा-चप्पा छान मारा था, लेकिन बंदी हाथ नहीं लगा था। यह बात दीगर है कि अब जेल प्रशासन की फांस घास और बांस ने बचा दी।
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डीआईजी (जेल, प्रयागराज) संजीव कुमार त्रिपाठी ने उच्चाधिकारियों को अवगत कराया कि चोरी के आरोप में बंद कैदी विजय आरख कारागार कृषि फार्म में कार्य करता था। वहां पर उसने एक बड़े बांस को देखा तो उसने भागने का मन बना लिया। बैरक की छत पर चढ़कर बांस की सहायता से सर्किल दीवार को फांद गया। इससे उसके कमर में चोट आ गई और 23 फीट ऊंची मुख्य दीवार को पार करने लायक नहीं रहा। वह वहीं घास के बीच छिप गया। घंटों मशक्कत के बाद उसे ढूंढा जा सका। हालांकि, यह बात लोगों के गले नहीं उतर रही है। चर्चा है कि फरार बंदी विजय की तलाश में जेल कर्मियों ने कृषि फार्म और आसपास पूरे जेल परिसर का चप्पा-चप्पा छान मारा था, पर वह नहीं मिला था, लेकिन अंधेरा होते ही उसी स्थान पर बंदी का मिलना चौंकाने जैसा है।
उधर, जानकारों का कहना है कि कृषि फार्म और बैरक व छत आदि में बांस, डंडा या लाठी आदि नहीं रखे जा सकते। जरा सी चूक पर बंदी इनका इस्तेमाल कर हमला कर सकता है। दूसरा कृषि फार्म में घास-फूस इतनी बड़ी नहीं होती की कि उसमें छिपा जा सके। दूसरी तरफ हाई सिक्योरिटी जेल में 44 कैमरे व 132 बंदी रक्षक हैं। इसके बाद भी कृषि फार्म में छिपे बंदी को ढूंढने में 22 घंटे लग गए। चर्चा रही कि यह कहानी महज जेल अधिकारियों व कर्मचारियों को बचाने का प्रयास है। यह भी चर्चा रही कि बंदी को पुलिस ने कहीं और से दबोचा गया है।
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डिप्टी जेलर व बंदी रक्षकों पर लटकी तलवार
बाहुबली विधायक गैंगस्टर मुख्तार के यहां आने के बाद जेल हाई सिक्योरिटी सुविधा से लैस हो गई। इसके बावजूद मामूली बंदी विजय आरख का भाग निकलना जेल सुरक्षा में बड़ी चूक है। डीआईजी जेल (प्रयागराज) संजीव कुमार त्रिपाठी ने इस प्रकरण की जांच शुरू कर दी है। सोमवार को कारागार अधीक्षक व जेलर सहित दो डिप्टी जेलर, आठ बंदी रक्षकों और बंदी के बयान दर्ज किए। सूत्रों के मुताबिक, दो दिन बाद डीआईजी जेल ने अपनी रिपोर्ट शासन को भेजेंगे। जांच के बाद बंदी रक्षकों पर कार्रवाई लगभग तय मानी जा रही है।
डीआईजी जेल ने माना हुई चूक
डीआईजी जेल संजीव कुमार त्रिपाठी ने माना कि बंदी के बैरक में चढ़ने और बांस के सहारे सर्किल वॉल से कूदकर भागने में कहीं न कहीं चूक हुई है। कारागार अधीक्षक अरुण कुमार भी बंदी के भागने के मामले को चूक बता रहे हैं। डीआईजी जेल ने बंदी से पूछताछ के बाद भागने का तरीका भी समझा।
मुकदमा खत्म करने को कोतवाली में दिया पत्र
बंदी के भागने की रिपोर्ट कोतवाली में दर्ज कराई गई थी। बंदी के मिलने के बाद उन्होंने मुकदमा खत्म करने के लिए कोतवाली में प्रार्थनापत्र दिया है। बंदी के भागने की विभागीय जांच जारी रहेगी। डीआईजी जेल की रिपोर्ट पर कार्रवाई के लिए बड़े अफसर निर्णय लेंगे।
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-अरुण कुमार, कारागार अधीक्षक
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