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हर चुनाव में गरमाता रहा गायत्री का मुद्दा

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फोटो-11- घर के गेट में जडा ताला और चस्पा नोटिसें। संवाद - फोटो : CHITRAKOOT
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चित्रकूट। विधानसभा चुनाव के ऐन मौके पर पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति फिर मुद्दा और सुर्खियां बन गए। यह संयोग ही कहा जाएगा कि पिछले विधानसभा चुनाव के समय इसकी रिपोर्ट दर्ज हुई थी। अब चुनाव आया तो अदालत से उन्हें उम्रकैद का फैसला आ गया। ऐसे में माना जा रहा है कि सत्ता पक्ष सहित अन्य दल चुनाव में यह मुद्दा गरमाएंगे।
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वर्ष 2012 में प्रदेश में सपा की सरकार बनने के बाद तत्कालीन मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति और चित्रकूट की महिला के बीच जान पहचान बनी। वर्ष 2014 तक अकूत संपत्ति और अन्य मामलों को लेकर यह बिगड़ने लगी। 2014 के लोकसभा चुनाव में यह मुद्दा छाया रहा। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के पहले गायत्री प्रसाद प्रजापति व उसके साथियों पर गैंग रेप मामले की शिकायत दर्ज कराई गई। ठीक चुनावी माहौल में इसकी रिपोर्ट दर्ज हो गई। दो विधानसभा चुनाव के बाद लोकसभा चुनाव में भी गायत्री कांड गरमाया रहा। भाजपा नेता से लेकर अन्य नेता सभा में इस घटना को लेकर प्रमुखता से उठाते रहे हैं।
अब विधानसभा चुनाव सिर पर है तो फिर गायत्री मुद्दा गरमा गया है। अदालत ने गायत्री को उम्रकैद की सजा दी है। ऐसे में यह तय माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव में इसे उछाला जाएगा।
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दो बार ही चित्रकूट आया गायत्री प्रजापति
गायत्री और उसके सहयोगियों को भले ही चित्रकूट की महिला से दुष्कर्म में सजा हुई हो, लेकिन गायत्री का चित्रकूट जिले से अधिक लगाव नहीं था। वह एक-दो बार ही मंत्री रहते हुए सपा शासन काल में चित्रकूट आया था। सपा के स्थानीय कार्यकर्ताओं से मिलकर चला गया था। इसके अलावा वह अन्य कार्यक्रमों में भाग नहीं लिया। स्थानीय निवासियों से भी ज्यादा संबंध नहीं है। संवाद
अधूरी रह गईं महिला की राजनैतिक हसरतें
(अनूप दुबे)
चित्रकूट। पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति पर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली चित्रकूट की महिला की राजनैतिक हसरतें पूरी नहीं हो सकी। जानकारों की मानें तो सभासद बनने के बाद से ही उसकी महत्वाकांक्षा राजनैतिक गलियारे में बढी थी। इसके चलते वह चित्रकूट नगर पालिका के अध्यक्ष पद पर खड़ी हुई थी, लेकिन चुनाव हार गई थी। कई बड़ी पार्टियों के साथ जुड़कर भी काम किया, लेकिन इस प्रकरण के बाद से उसका राजनैतिक कॅरियर खतरे में पड गया।
पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति पर आरोप लगाने वाली महिला की हसरत थी कि वह विधायक और सांसद बने। नगर पालिका के अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़कर शुरुआत भी किया था। जनता का समर्थन न मिलने के कारण वह चुनाव हार गई।
पूर्व मंत्री पर दुष्कर्म का आरोपी लगाने के बाद से उसने राजनीति से दूरियां बना ली। किसी पार्टी में शामिल नहीं हुई और न ही किसी कार्यक्रम में भाग लेती थी। आज हालत यह है कि उसके घर पर ताला लगा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली महिला समाज सेवी है, लेकिन राजनैतिक रूप से कुशल नहीं है।
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