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बुंदेलखंड के चार बांधों में पिंजरों में पलेंगी मछलियां

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बांदा के रनगवां बांध में मछली पालन के लिए बनाया गया केज (पिंजरा) कल्चर। - फोटो : BANDA
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बांदा। विदेशों की तर्ज पर अब बुंदेलखंड के बांधों में भी केज कल्चर (पिंजरा पद्धति) से मछली पालन होगा। इसके लिए भारत सरकार की नीली क्रांति योजना से बुंदेलखंड के चार प्रमुख जलाशयों (बांधों) को चिह्नित किया गया है। पानी में तैरते हरेक केज (पिंजरों) में तीन हजार अंगुलिकाएं (बीज) डाले जाएंगे। पहले चरण में 48 केज बनाए जा रहे हैं। इनमें करीब 1000 क्विंटल मछलियां तैयार होंगी।
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केज कल्चर के जरिये मछली का पालन विदेशों में होता है। अब इसे नीली क्रांति योजना में शामिल करके बुंदेलखंड में लागू किया गया है। पहले चरण में बुंदेलखंड के चार बांधों रनगवां (बांदा), अर्जुन (महोबा), बड़वार (झांसी) और शहजाद (ललितपुर) शामिल हैं।
मत्स्य पालन विभाग का दावा है कि इस योजना से अगले छह महीनों में बुंदेलखंड में मछली पालन दोगुना हो जाएगा। हरेक परियोजना में 12 केज (पिंजरा) बनेंगे। हरेक की लागत 18 लाख रुपये होगी। इसमें लाभार्थी मत्स्य पालक को 40 फीसदी अनुदान मिलेगा। इसमें केंद्र का अंश 60 और राज्य सरकार का अंश 40 फीसदी होगा। रनगवां और अर्जुन बांधों में केज तैयार किए जा चुके हैं। ललितपुर और झांसी में तैयार किए जा रहे हैं।
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इन बांधों में बनेंगे केज कल्चर
जिला बांध लागत
बांदा रनगवां 18 लाख रुपये
महोबा अर्जुन 18 लाख रुपये
झांसी बड़वार 18 लाख रुपये
ललितपुर शहजाद 18 लाख रुपये
योग 72 लाख रुपये
फाइबर और जाल से बनेगा केज
केज कल्चर मत्स्य पालन परियोजना के तहत पिंजरा (केज) फाइबर का होगा। इसकी लंबाई 7.5 मीटर और चौड़ाई 7.65 व गहराई 1.5 मीटर होगी। चारों तरफ नीचे तक जाल लगा होगा। पानी में डूबे इस जाल में मछली पाली पाएंगी। केज को जरूरत के मुताबिक इधर-उधर भी किया जा सकेगा। यह पानी में तैरता रहेगा। जरूरत पड़ने पर इसे आगे पीछे किया जा सकता है।
मांग से तीन गुना होगा उत्पादन
मत्स्य विभाग के मुताबिक हरेक केज में 20 क्विंटल मछली का उत्पादन होगा। 48 केज में 960 क्विंटल मछलियों का उत्पादन होगा। मत्स्य विभाग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एसी वर्मा का कहना है कि बुंदेलखंड में अधिकतम 300 क्विंटल मछलियों की छमाही खपत है, जबकि केज योजना से करीब एक हजार क्विंटल उत्पादन होगा।
पंगा प्रजाति का 5 रुपये में मिलेगा बीज
केज कल्चर में मछली पालन के लिए ठेकेदार को पंगा प्रजाति की अंगुलिका (बीज) पांच रुपये प्रति बीज की दर से मिलेगा। एक केज में 20 हजार बीज डाले जाएंगे। इसके अलावा मछलियों का दाना (फार्मुलेटेड फ्लोटिंग फिश फीड) 34 रुपये प्रति किलो मिलेगा। प्रति केज में 3900 किलो ग्राम दाना लगेगा। मछलियों की दवाओं के लिए 28 हजार रुपये दिए जाएंगे।
केज कल्चर मत्स्य परियोजना बुंदेलखंड के लिए बेहतर साबित होगी। शासन ने मूल लागत का 80 फीसदी बजट (60 लाख रुपये) जारी कर दिया है। मत्स्य पालक लाभार्थी को 40 फीसदी अनुदान मिलेेगा। रनगवां और अर्जुन बांध में काम शुरू हो गया है।-ज्ञानेंद्र सिंह, उप निदेशक (मत्स्य)
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झांसी/चित्रकूटधाम मंडल, बांदा
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