फोटो-05 बीएनडीपी-13 : किसान द्वारा तैयार किए गए जैविक गमले। अमर उजाला
स्नातक किसान ने तैयार किया जैविक गमला
10 रुपये लागत में गोबर-मिट्टी से बनाया, पौधे के विकास में डेढ़ गुना अधिक क्षमता
अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। अब जैविक गमलों में भी पौधरोपण किया जा सकेगा। ये गमले गोबर और मिट्टी से तैयार किए गए हैं। इन गमलों के पौधे सामान्य भूमि में रोपे गए पौधों से लगभग डेढ़ गुना तेजी से बढ़ते हैं। जैविक गमलों का निर्माण अतर्रा नगर निवासी प्रगतिशील किसान अशोक श्रीवास्तव ने किया है।
उन्होंने बताया कि जैविक गमलों में पानी सोखने की क्षमता अन्य गमलों से आठ गुना अधिक होती है। इनमें नमी अधिक दिनों तक बनी रहती है। यह बंजर जमीन में भी सफल हैं। रोपण के बाद पौध की जड़ें जितनी तेजी से बढ़ेंगी उतनी ही तेजी से जैविक गमला मिट्टी में मिलता जाएगा। गमले के निर्माण में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश आदि का मिश्रण है। जल्द ही ये गमले बाजार में उपलब्ध होंगे। इसकी लागत मात्र 10 रुपये है। इसी तरह 20 गमलों वाले जैविक नर्सरी पॉट सेट की लागत 100 रुपये बताई गई है। किसान अशोक ने बताया कि घरेलू गाय के कंडे से निकलने वाली राख से तैयार किए गए मिश्रण में फलों को एक माह तक सुरक्षित रखा जा सकता है। किसान अशोक श्रीवास्तव कृषि में स्नातक हैं। इन्होंने लगभग 52 बीघा क्षेत्रफल को जैविक ग्राम का नाम दिया है।
इनसेट...
गमलों में शामिल है जैविक मिश्रण
जैविक गमलों के निर्माण में गाय का गोबर, मिटटी, खली, गुड़, नीम आदि का मिश्रण शामिल है। इसे मशीन के जरिये गमले का आकार दिया जाता है। इसमें रासायनिक खाद की कोई आवश्यकता नहीं है। दीमक और कीड़े भी नहीं लगते।