बांदा। पुलिस विभाग में फर्जी फालोवर भर्ती का भांडा फूट गया। जांच के बाद अंधेरगर्दी की खुली पोलों पर सख्त रुख अपनाते हुए प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ने पिछले वर्ष यहां भर्ती किए गए आधा दर्जन फालोवर्स को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है। भर्ती करने वाले तत्कालीन पुलिस अधीक्षक और अन्य विभागीय कर्मियों पर भी कार्रवाई होगी।
वर्ष 2015 में बांदा जिला पुलिस प्रशासन ने चतुर्थ श्रेणी फालोवर्स के छह पदों पर नियुक्ति की थी। उस समय पुलिस अधीक्षक राकेश शंकर थे। उन्होंने ही नियुक्तियां की थीं। नियुक्तियों के बाद ही इन पर उंगली उठने लगी थी। इसमें पुलिस विभाग के कुछ कर्मचारी भी शामिल थे जिन्होंने अपने चहेतों को भर्ती करा लिया था।
शिकायतों पर पुलिस महानिदेशक ने चित्रकूटधाम मंडल के डीआईजी को जांच के आदेश दिए। डीआईजी ज्ञानेश्वर तिवारी ने पूरी भर्ती प्रक्रिया की जांच-पड़ताल की। जांच में खुलासा हुआ कि फालोवर्स के जिन पदों पर भर्ती की गई है, वे पद थे ही नहीं। न ही इन पदों की भर्ती के लिए पुलिस हेड क्वार्टर से एप्रूवल लिया गया था। सब कुछ यहां के पुलिस अधीक्षक और संबंधित कर्मचारियों ने कर लिया था।
डीआईजी की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद पुलिस महानिदेशक ने फर्जी भर्ती घोटाले पर कार्रवाई करते हुए भर्ती किए गए सभी छह फालोवर्स की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं। पुलिस महानिदेशक के आदेश मिलने के बाद पुलिस अधीक्षक राजेंद्र प्रसाद पांडेय ने सभी छह फालोवर्स का तत्काल बर्खास्त कर दिया है।
बर्खास्त फालोवर्स ने जय नारायण पुत्र जय बहादुर, सर्वेश कुमार पुत्र लालता प्रसाद, मयंक तिवारी पुत्र नीरज, जितेंद्र पटेल पुत्र राममूर्ति, विनय कुमार पुत्र ज्ञान सिंह और धीरेंद्र सिंह पुत्र धनीराज शामिल है। इनमें एक फालोवर पुलिस कार्यालय के लिपिक का बेटा है। अन्य भी रसूख वाले या किसी न किसी के चहेते हैं।
यह मामला कर्थित फालोवर्स की बर्खास्तगी पर ही खत्म नहीं होगा। पुलिस महानिदेशक ने इसमें दोषी और संलिप्त लोगों पर को भी चिन्हित कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। डीआईजी ज्ञानेश्वर तिवारी ने इस मामले की खुद के द्वारा जांच करने और अब फालोवर्स की बर्खास्तगी की पुष्टि की है।
पैरोकार तरेर रहे अफसरों पर आंखें
बांदा। फालोवर्स का पद भले ही चतुर्थ श्रेणी का हो, लेकिन उसके पैरोकार भारी भरकम हैं। भर्ती कराने वाले पुरोधा अब अपने रसूख का इस्तेमाल इस फर्जीबाड़े का भंडाफोड़ और जांच व बर्खास्तगी करने वालों पर करने की जुगत में हैं। सत्ता या नेताओं तक पहुंच रखने वाले अब इस मामले में कार्रवाई करने वाले अफसरों पर आंखे तरेर रहे हैं। हालांकि संबंधित अधिकारी खुद को मिल रही धौंस धमकी के बारे में कुछ भी मुंह नहीं खोल रहे हैं।