बांदा/मटौंध। बालू के ट्रकों से रंगदारी वसूल रहे आठ लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उनके पास एक लाइसेंसी रिवाल्वर, दो लग्जरी वाहन और वसूली का हिसाब-किताब दर्ज करने वाला रजिस्टर बरामद हुआ है। गिरफ्तार आरोपी यूपी-एमपी के माननीयों के गुर्गे बताए गए हैं। न्यायालय में पेश करने के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया। आरोपी बांदा, छतरपुर और गोंडा के रहने वाले हैं।
सीमावर्ती मध्य प्रदेश की खदानों से बालू के ट्रकों की आमद का सिलसिला काफी पुराना है। गुंडा टैक्स या रंगदारी की वसूली भी पुरानी परंपरा है। यह अभी भी चल रही थी। बुधवार की रात करीब साढ़े 11 बजे मटौंध थाना इंस्पेक्टर पंकज कुमार पांडेय और बांदा शहर कोतवाली इंस्पेक्टर दिनेश सिंह ने पुलिस फोर्स के साथ संयुक्त रूप से एमपी की सरहद पर गौरिहार मार्ग में दबिश देकर पेट्रोल पंप के पास बालू के ट्रकों से उगाही कर रहे आठ लोगों को रंगेहाथ दबोच लिया। पुलिस के मुताबिक बगैर रॉयल्टी वाले बालू ट्रकों से 11000 रुपये और रॉयल्टी लिए ट्रकों से 7000 रुपये वसूल रहे थे।
गिरफ्तार आरोपियों में लल्लू प्रजापति पुत्र बगना प्रजापति (जारी, बांदा), शेखर उर्फ चंद्रशेखर पुत्र प्रतिपाल निवासी बलरामपुर (छतरपुर), आशीष पाल पुत्र रामसजीवन (तलइया, लवकुश नगर, छतरपुर), सत्यनारायण त्रिवेदी पुत्र संतोष (जारी, बांदा), सत्यम प्रजापति पुत्र खेमचंद्र (लवकुश नगर, छतरपुर), सुनील प्रजापति पुत्र छोटू प्रजापति (लवकुश नगर, छतरपुर), अनिल पुत्र पन्नालाल (मनकापुर, गोंडा) और उदयराज पुत्र रामदीन (मनकापुर, गोंडा) शामिल हैं।
मटौंध इंस्पेक्टर पंकज पांडेय ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से एक बोलेरो और एक टाटा नेक्शन चार पहिया वाहन, एक फैक्टरी मेड लाइसेंसी रिवाल्वर, वसूली का हिसाब-किताब दर्ज करने वाला रजिस्टर और 3970 रुपये बरामद हुए हैं। रिवाल्वर लल्लू प्रजापति के पास बरामद हुई, जो जारी गांव के राजू पुत्र भैरम की लाइसेंस बताई गई है। आठों के विरुद्ध धारा 386 (रंगदारी वसूलना), 411 और शस्त्र अधिनियम की धारा 3/25 में रिपोर्ट दर्ज करने के बाद न्यायालय में पेश किया गया।
वहां से न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। उधर, पुलिस अधीक्षक गणेश साहा ने बताया कि अवैध वसूली की सूचना मिलने पर पुलिस भेजी गई थी। इसकी जांच अपर एसपी एलबीके पाल कर रहे हैं। ऐसे लोगों पर आगे भी कार्रवाई की जाएगी। जरूरत हुई तो टास्क फोर्स बनाकर नियमित रूप से जांच कराई जाएगी। इस मामले में माननीयों के शामिल होने के सवाल पर एपी ने कहा कि जांच की जा रही है, जिसका भी नाम आएगा, उस पर कार्रवाई होगी।
गुर्गों की रिहाई के लिए माननीयों ने की सिफारिश
मटौंध/बांदा। मटौंध क्षेत्र में रंगदारी वसूली करने वाले यूपी-एमपी के दो भाजपा माननीयों के गुर्गे बताए गए हैं। पुलिस द्वारा इन्हें दबोचे जमाने के बाद इन माननीयों ने पर्दे की आड़ से उन्हें छुड़ाने के लिए भरपूर कोशिशें कीं।
पुलिस अफसरों को टेलीफोन और अपने संदेशवाहक भेजकर रिहाई की कोशिश कराई, लेकिन चर्चा यह भी है कि कार्रवाई करवाने के पीछे भी सत्तारूढ़ दल के ही माननीय का हाथ बताया जा रहा है। माननीय और पुलिस के एक बड़े अफसर की मंशा पर हुई इस धरपकड़ का असर यह रहा कि पुलिस ने सिफारिशों को दरकिनार कर आठों आरोपियों का चालान कर दिया। सीमावर्ती मध्य प्रदेश के माननीय भी बालू के इस खेल में शामिल बताए गए हैं। कुल मिलाकर सत्तारूढ़ दल के जनप्रतिनिधि और माननीय बालू की जंग में एक-दूसरे को ही मात देने की जुगत में जुटे हैं।
हरेक ट्रक से 5 से 7 हजार वसूलता है सिंडीकेट
बांदा। बालू के खदानों और ट्रकों से रंगदारी और सिंडीकेट वसूलने की बसपा सरकार में इसकी शुरूआत हुई। साल-दर-साल यह और परवान चढ़ती गई। मौजूदा समय में सिंडीकेट के नाम पर ट्रकों से 5 से 7 हजार रुपये प्रति ट्रक वसूले जा रहे हैं। एमपी से लाई जा रही बालू के ट्रकों को भी बांदा (यूपी) से गुजरने के दौरान यह %टैक्स’ देना पड़ रहा है। सफेद और खाकी पोशों के बीच तालमेल और गठजोड़ से यह धंधा थामे नहीं थम रहा। वसूली और बंटवारे के तार काफी दूर-दूर तक जुड़े और फैले बताए जा रहे हैं।