बांदा। सूखे बुंदेलखंड में घास की रोटियां खाने जैसी
खबरों से संतों-महंतों के दिल भी पसीज उठे। नोएडा के महंत ने आकर कपड़े और
नगदी बांटी।
यहां गरीबी और तंगहाली तो खूब मिली पर घास की रोटी उन्हें नजर नहीं आई। महंत ने फिलहाल 20 परिवारों को सहारा दिया है।
नरैनी
क्षेत्र के कुछ गांवों की गरीबी और तंगहाली को मीडिया ने सुर्खियां बनाई।
भुखमरी और घास की रोटियों के हालात बताए। खबरें पढ़कर कानपुर की स्वयंसेवी
संस्था ने नौगवां गांव के सुलखान का पुरवा को गोद लेने का एलान किया और 50
परिवारों को एक माह का राशन सौंपा।
इसके दो दिन बाद गुरुवार को
नोएडा में कासना आश्रम के महंत आलोक गिरि भी यहां आ गए। उन्होंने रगौली
भटपुरा, बिदुआ पुरवा, बाबा पुरवा और माधवपुर गांवों में जरूरतमंद गरीब
परिवारों को कपड़े और नगदी दी।
महंत ने बताया कि मीडिया से मिली
खबरों पर उनका दिल पसीज उठा। उन्होंने दिल्ली के लोगों से चंदे के रूप में
10 हजार रुपये और कपड़े जुटाए। कुछ अपने पास से भी मिलाए।
महंत ने
स्वयंसेवी आशीष सागर, वीरेंद्र गोयल, नवीन श्रीवास्तव, शैलेंद्र, विवेक आदि
को साथ लेकर गांवों का जायजा लिया। रगौली में 12 परिवारों और बाबू पुरवा
में आठ परिवारों को एक-एक हजार रुपये और कपड़े दिए।
माधवपुर
मेंअच्छेलाल को एक हजार रुपये और कपड़ा और बिदुआ पुरवा में विधवा वृद्धा को
एक हजार रुपये व कपड़े सौंपे। रगौली गांव में कुछ दिन पहले आग से झुलसी
कुमारी आरती को भी मदद दी। पिता श्रीपाल निषाद को भरोसा दिलाया कि बेटी की
शादी में भी मदद करेंगे।
समाजसेवी शिवमूरत द्विवेदी ने
सहयोगियों के साथ सूखा पीड़ित लगभग 50 किसानों को आटा, चावल वितरित किया।
इसमें ऐसे पीड़ितों को चुना गया, जिनके घरों में तीन दिन से चू्ल्हे नहीं
जले।
मूड़ी गांव में पांच किसानों को आटा और चावल 10-10 किलो दिया
गया। परसहर, पुरैनिया, सकतपुर, कहला, रक्सी, छतैनी गांव में भी प्रभावित
किसानों को आटा-चावल बांटा गया।
उन्होंने बताया कि क्षेत्र का भ्रमण कर पूरे माह ऐसे लोगों को राशन बांटेंगे जिनके घरों में चूल्हे नहीं जल रहे।