बांदा। कर्ज के बोझ और सूखे से फसल बर्बाद होने से परेशान युवा किसान ने फांसी लगा ली। घटना बबेरू तहसील के कैरी गांव की है।
उधर बबेरू तहसील के बछौंधा गांव और नरैनी तहसील के बड़ोखर बुजुर्ग में दो किसानों की फसल बर्बादी के सदमे से मौत हो गई।
बिसंडा
थाना क्षेत्र के कैरी गांव में धर्मपाल पटेल (38) पुत्र लालमन ने बुधवार
रात अपने घर में फांसी लगा ली। घटना के समय पत्नी पड़ोस में रिश्तेदार के
घर गई थी।
लौटने पर उसने पति धर्मपाल का शव फांसी के फंदे से लटकता
देखा। छोटे भाई अनिल ने बताया कि धर्मपाल तीन भाइयों में सबसे बड़ा था।
उसके नाम पांच बीघा जमीन है।
सूखे से खेत परती पड़े हैं। मंगलवार
को धर्मपाल ट्यूबवेल चलाने गया लेकिन जल स्तर गिरने से ट्यूबवेल जवाब दे
गया। घर लौटने के बाद से बड़ा भाई तनाव में था।
उसके नाम इलाहाबाद
यूपी ग्रामीण बैंक की कोर्रही शाखा का 70 हजार रुपये कर्ज था। इसके अलावा
धर्मपाल ने गांव के लोगों और रिश्तेदारों से भी लगभग एक लाख रुपये कर्ज ले
रखा था।
एसडीएम सुरेंद्र प्रसाद यादव ने बताया कि राजस्व कानूनगो और लेखपाल को मृतक के घर भेजकर घटना की जांच कराई जाएगी।
उधर
बुधवार को बबेरू तहसील के बछौंधा गांव मेें कामता उर्फ कमतू (35) पुत्र
रामबहोरी की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। वह पत्नी सोना के साथ खेत में
बुआई करने गया था लेकिन खेत में नमी न होने से बुआई नहीं कर सका।
खरीफ
की फसल बर्बाद होने से कामता पहले ही परेशान था। उस पर बैंक का 60 हजार
रुपये कर्ज भी था। पत्नी के मुताबिक दो साल से खेत में कुछ न होने से पति
तनाव में रहता था।
एसडीएम सुरेंद्र प्रसाद यादव ने बताया कि जांच
के लिए तहसीलदार को गांव भेजा गया है। इसी क्रम में नरैनी तहसील के बड़ोखर
बुजुर्ग गांव के ब्रजलाल कुशवाहा (55) बुधवार शाम खेत गया था।
धान
की फसल चौपट होने और रबी की बुवाई न होने के सदमे में उसकी तबियत बिगड़ गई।
रात में उसने दम तोड़ दिया। किसान पर दो लाख रुपये का कर्ज था।