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दो रोगों के डॉक्टर की नियुक्ति से इनकार

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बांदा। चित्रकूटधाम मंडल में हृदय रोग, न्यूरो और कैंसर के मरीजों में लगातार इजाफा हो रहा है और दूसरी तरफ प्रदेश सरकार यहां जिला अस्पतालों इन रोगों के चिकित्सक/विशेषज्ञ भी मुहैया कराने के मूड में नहीं है। चारों जनपदों बांदा, हमीरपुर, महोबा और चित्रकूट में इनके विशेषज्ञों के पद ही सृजित नहीं किए गए।
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निकट भविष्य में भी इसकी उम्मीद नहीं है। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ने दो टूक इन पदों पर डॉक्टरों की नियुक्ति से इनकार कर दिया है। चित्रकूटधाम मंडल के चारों जनपदों बांदा, हमीरपुर, महोबा और चित्रकूट की आबादी 50 लाख से ज्यादा है।
अन्य मर्जों के साथ यहां हृदय, न्यूरो और कैंसर जैसे जानलेवा मर्ज के मरीज भी बड़ी तादाद में हैं, लेकिन चारों जिलों के जिला अस्पतालों में इन तीनों रोगों के विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद ही सृजित नहीं किए गए।
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विधान परिषद सदस्य सुरेश कुमार त्रिपाठी ने तारांकित प्रश्न के जरिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री से पूछा था कि चारों जिलों के राजकीय जिला चिकित्सालयों में हृदय, त्वचा, न्यूरो और कैंसर आदि रोग के विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद सृजित हैं या नहीं।
इस पर चिकित्सा व स्वास्थ्य मंत्री जय प्रकाश सिंह ने बृहस्पतिवार को दिए लिखित जवाब में कहा कि उत्तर प्रदेश चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा नियमावली 2020 के अंतर्गत हृदय रोग, न्यूरो व कैंसर रोग के विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद सृजित नहीं हैं।
मंत्री ने कहा कि इन जनपदों में त्वचा रोग के एक-एक पद सहित प्रदेश में कुल 145 त्वचा रोग विशेषज्ञ के पद सृजित हैं। विधान परिषद सदस्य त्रिपाठी द्वारा यह भी पूछा गया कि विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद सृजित करने पर क्या विचार होगा।
इस पर मंत्री ने कहा कि हृदय, न्यूरो व कैंसर रोग की विशेषज्ञता/सुपर स्पेशियलिटी के पद टर्शियरी केयर के अस्पतालों अर्थात चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन संचालित मेडिकल कॉलेजों में निहित होते हैं। विधान परिषद सदस्य के इस सवाल पर कि पद कब तक सृजित किए जाएंगे, जवाब में मंत्री ने दो टूक शब्दों में यह कहकर इनकार कर दिया कि प्रश्न नहीं उठता।
40 फीसदी से ज्यादा डॉक्टरों के पद खाली
गरीबी, पिछडे़पन, अशिक्षा और भौगोलिक परिस्थितियों के चलते चित्रकूटधाम मंडल और बुंदेलखंड में बीमार और बीमारियों की संख्या पूरे वर्ष बड़ी तादाद में रहती है। इसके बावजूद यहां सरकारी अस्पतालों में स्वीकृत पदों में शतप्रतिशत नियुक्ति नहीं रहतीं।
चित्रकूटधाम मंडल में लगभग 40 फीसदी से ज्यादा सरकारी डॉक्टरों के पद रिक्त हैं। शासन द्वारा यहां नियुक्ति के बाद भी तमाम डॉक्टर नहीं आए। जोड़तोड़ करके अपने तबादले निरस्त या कहीं और करा लिए। स्वीकृति के सापेक्ष नियुक्ति का आंकड़ा मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी तक कम है।
हृदय रोगियों को लगाना पड़ रही कानपुर की दौड़
मंडल के चारों जिलों में हृदय रोग विशेषज्ञ न होने से मरीजों को कानपुर-लखनऊ की दौड़ लगाना पड़ रही है। खास बात यह है कि मेडिकल कालेज हो या जिला अस्पताल, ईसीजी के अलावा हृदय रोग से संबंधित आधुनिक उपकरणों का भी अभाव है।
जिला अस्पताल में मात्र एक हृदय रोग विशेषज्ञ डा. केएल पांडेय के पिछले वर्ष 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त हो जाने के बाद से यह पद अब तक खाली है। आठ माह बीत गए, न स्वास्थ्य विभाग ने इस पद को भरने की जरूरत समझी और न ही शासन स्तर से कोई कार्रवाई हुई।
नतीजे में हृदय रोग से ग्रसित मरीजों को अच्छा इलाज नहीं मिल पा रहा। उनकी जान पर बन रही है। साथ ही अरबों रुपये के लागत वाले मेडिकल कालेज में इस विभाग के विशेषज्ञ का टोटा है। आलम यह है कि मरीज की ईसीजी रिपोर्ट फिजीशियन देख रहे, जबकि जरा सी चूक मरीज पर भारी पड़ सकती है। अच्छे उपकरण भी नहीं हैं।
जनपद स्वीकृत नियुक्ति रिक्त
बांदा 167 79 88
चित्रकूट 140 83 57
हमीरपुर 152 59 93
महोबा 110 47 63
योग- 569 268 301
नोट- यह आंकड़े डेढ़ पूर्व जून के हैं।
नियुक्ति के लिए शासन से अनुरोध
रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए समय-समय पर शासन को लगातार अवगत कराया जाता है। पत्राचार किया जाता है। हाल ही में हुए स्थानांतरणों में मंडल को काफी नए डॉक्टर मिले हैं। साथ ही काफी संख्या में यहां से स्थानांतरित भी किए गए हैं। पूर्व की अपेक्षा अब स्थिति बेहतर है।
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- डॉ. आरबी गौतम, अपर निदेशक स्वास्थ्य, चित्रकूटधाम मंडल
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