उन्नाव। बुखार मरीजों को अब जिला अस्पताल में ही प्लाज्मा मिल सकेगा। स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए कवायद शुरू कर दी है। जल्द ब्लड सेपरेशन यूनिट का संचालन शुरू हो जाएगा। इससे संक्रामक रोगियों को राहत मिलेगी।
बारिश के बाद संक्रामक रोगों का कहर शुरू हो जाता है। डेंगू मरीजों की प्लेटलेट्स काफी तेजी से गिरती हैं। ऐसे मरीजों को प्लाज्मा की जरूरत पड़ती है। जिला अस्पताल में यह व्यवस्था न होने से मरीजों को निजी ब्लड बैंकों से प्लाज्मा लेना पड़ता है, लेकिन इस बार उन्हें जिला अस्पताल में ही प्लाज्मा मिल सकेगा। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने कवायद शुरू कर दी है।
जिला अस्पताल में बने ब्लड सेपरेशन यूनिट का संचालन एक से डेढ़ माह में शुरू हो जाएगा। जल्द ही लाइसेंस मिलने के बाद इसका संचालन शुरू करा दिया जाएगा। ताकि इस बार मरीजों को निजी ब्लड बैंकों पर निर्भर न होना पड़े।
तीन साल से लाइसेंस का इंतजार
जिला अस्पताल में तीन साल पहले ब्लड सेपरेशन यूनिट का निर्माण कराया गया था। इसमें ब्लड सेपरेटर मशीन, डीप फ्रीजर आदि जरूरी मशीनें और उपकरण भी उपलब्ध हो गए हैं। इसके अलाव स्टाफ की भी तैनाती कर दी है। ब्लड सेपरेशन यूनिट संचालन के लिए लाइसेंस की जरूरत होती है। इसके लिए जिला अस्पताल प्रशासन ने सभी व्यवस्था पूरी करने के बाद आवेदन भी कर दिया है। जल्द ही लाइसेंस मिलने पर संचालन शुरू करा दिया जाएगा।
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नहीं लेने पड़ेंगे निजी ब्लड बैंकों से कंपोनेंट्स
मानव ब्लड में प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और पैक्ड रेड ब्लड सेल्स जैसे कंपोनेंट्स होते हैं। ब्लड की एक यूनिट से तीन मरीजों की जान बचाई जा सकती है। जिला अस्पताल में ब्लड सेपरेशन यूनिट का संचालन होने मरीजों को निजी ब्लड बैंक से कंपोनेंट्स नहीं लेने पड़ेंगे।
संचालन शुरू होने पर जरूरत के हिसाब से मिलेगा ब्लड
कई बार बच्चों को सिर्फ एक कंपोनेंट की जरूरत होती है। सेपरेशन यूनिट न होने से ब्लड बैंक से मरीज को पूरा ब्लड दे दिया जाता है। सेपरेशन यूनिट शुरू होने से आवश्यकता के अनुसार कंपोनेंट दिया जा सकेगा। छोटे शिशुओं के लिए छोटे पैकेट तैयार किए जाएंगे। इससे ब्लड खराब नहीं होगा। जरूरत के हिसाब से प्रयोग किया जा सकेगा।
ब्लड सेपरेशन यूनिट संचालन के लिए पत्राचार किया गया है। जल्द ही इसका संचालन शुरू कराया जाएगा। ताकि संक्रामक रोगियों को राहत मिल सके। - डॉ. जीपी गुप्ता, सहायक निदेशक स्वास्थ्य
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सेपरेशन यूनिट में सभी उपकरण भी पूरे हो गए हैं। संचालन के लिए आवेदन भी कर दिया गया था। लाइसेंस मिलते ही संचालन शुरू करा दिया जाएगा। - डॉ. आरए मिर्जा, सीएमएस