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ऐन मौके पर फरमान, निरस्तीकरण से बड़ा नुकसान

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Decree on the last occasion, big loss due to cancellation - फोटो : BANDA
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बांदा। ऐन मौके पर निरस्तीकरण का आ गया फरमान। हुआ बड़ा नुकसान। पेपर था आसान। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) परीक्षार्थियों ने अपनी पीड़ा कुछ इन्हीं शब्दों में बयां की। उनमें अफसोस के साथ रोष भी था। कई केंद्रों में परीक्षार्थियों ने नारे लगाकर विरोध जताया।
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पुलिस और प्रशासन के अफसरों ने बमुश्किल उन्हें शांत कराया। जिले में कुल 18 परीक्षा केंद्रों में 16,827 परीक्षार्थी पंजीकृत थे। पहली पाली में 10,043 परीक्षार्थी पंजीकृत थे। परीक्षा शुरू होते ही निरस्तीकरण की सूचना आ गई। आनन-फानन परीक्षार्थियों से आंसर शीट वापस ले ली गई। इस बीच ज्यादातर केंद्रों में अफरा-तफरी की स्थिति रही। आंसर शीट को डीआईओएस कार्यालय में रखा दी गईं।
शिवांगी चेन्नई से तीन दिन का सफर तय करके यहां परीक्षा देने आई थी। वहां पति रेलवे में तैनात हैं। परीक्षा निरस्त होने से काफी निराश नजर आ रही शिवांगी ने कहा कि लगभग 10 हजार रुपये आने-जाने में खर्च हो गया। वर्ष 2018 से तैयारी कर रही थी।
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अर्चना (अतर्रा) ने कहा कि परीक्षा के लिए पिछले करीब एक साल से अध्ययन कर रहे थे। संयोग से प्रश्न भी पढ़े हुए कोर्स से आए। अच्छे अंक मिलने की उम्मीद थी। लेकिन उम्मीद पर फिलहाल पानी फिर गया। अगली परीक्षा पता नहीं कैसी हो। आने-जाने में 800 रुपये खर्च हो गए।
प्रियंका परिहार (तिंदवारी) ने ऐन मौके पर परीक्षा निरस्त किए जाने के आदेश को गलत बताया। कहा कि करे कोई-भरे कोई। पेपर वायरल तब हुआ जब परीक्षा केंद्रों में परीक्षार्थी आ चुके थे और उनके पास मोबाइल फोन नहीं था। ऐसे में एक मुश्त परीक्षा केंद्रों में निरस्तीकरण परीक्षार्थियों के हित में नहीं रहा।
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