आंधी-बारिश से बर्बाद हुई फसल दिखाता किसान श्रीपाल।
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बांदा। आंधी और बारिश ने सिर्फ खेती ही नहीं बल्कि किसानों के मंसूबों पर भी पानी फेर दिया। पिछले तीन दिन से लगातार बिगड़े मौसम के तांडव ने किसानों का पूरे वर्ष का ड्योढ़ा और बजट गड़बड़ा दिया। कुछ की तो पूंजी भी वापस नहीं आ पा रही। बैंक और साहूकारों के कर्ज की अदायगी या बेटियों के हाथ पीले करने की तैयारी पर भी ‘लॉक’ लग गया।
एक ओर किसान जहां खेत और खलिहान में बची-खुची फसल समेट रहा है वहीं दूसरी ओर कृषि और राजस्व विभाग के मानक में यह नुकसान ‘ज्यादा’ नहीं है। कृषि विभाग के उप निदेशक एके सिंह का भी कहना है कि मौजूदा बारिश व ओला से जनपद में फसलों को कोई खास नुकसान नहीं हुआ है।
नरैनी में पटेल नगर निवासी और तीन बीघा के वृद्ध किसान श्रीपाल हैं। बताया कि यह जमीन भी बटाई पर ली है। खेत में कड़ी मेहनत करके अरहर बोई थी। जुताई से लेकर खाद-बीज तक करीब 10 हजार रुपये की लागत आई थी। फसल अच्छी थी। कटाई के बाद मड़ाई के लिए खलिहान में पड़ी थी। तभी पिछले दो दिनों से लगातार तेज बारिश, ओला और आंधी ने बुरी तरह भीग गई। फसल देखकर उम्मीद थी कि पूंजी के अलावा सालभर के घर का खर्च भी चल जाएगा। अब सूखने के बाद अरहर के दाने शायद पूंजी भी वापस कराने लायक न बचें।
बबेरू में पांडिन पुरवा के किसान भोला प्रसाद पांडेय ने 20 बीघे में गेहूं, चना, मसूर, लाही आदि बोया था। जुताई, बुवाई, खाद-पानी और फसल की तीमारदारी में लगभग 80 हजार रुपये खर्च हो गए। सहकारी समिति का कर्ज भी चढ़ गया। पिछले हफ्ते तक खेत देखकर दिल खुश हो जाता था कि पूंजी तो आएगी ही उसके अलावा भी फसल अबकी काफी कुछ देकर जाएगी। 1.10 लाख का बकाया बिजली बिल अदा हो जाएगा लेकिन पिछले तीन दिनों में जो कुदरती कहर आया उसने इन सारे मंसूबों पर पानी फेर दिया। सबसे ज्यादा फसल को नुकसान ओला और बारिश से हुआ है। भोला बताते हैं कि पिछले वर्ष भी अन्ना जानवरों ने फसल सफाचट कर दी थी। लगातार दूसरे साल यह चपत लगी है। इस वर्ष अपनी बेटी की शादी का मंसूबा बनाए थे। अब पता नहीं यह कैसे होगा?
फौजदार पुरवा (अतर्रा ग्रामीण) के किसान उमेश यादव ने अपनी तीन बीघा जमीन में गेहूं बोया था। लगभग 25 हजार रुपये पूंजी लगी थी। इसमें कुछ पैसा रिश्तेदारों से कर्ज लिया था। सब कुछ ठीकठाक रहा। उम्मीद थी कि लगभग 15 क्विंटल गेहूं पैदा होगा लेकिन हाल ही में हुई बारिश, आंधी और ओलावृष्टि ने खलिहान में कटी पड़ी फसल मटियामेट कर दी। काफी फसल तो आंधी में दूर तक उड़ गई। शेष बारिश के पानी में डूब गई। अब जो हालात हो गए हैं, भगवान के ही भरोसे हैं। इससे पहले धान की फसल भी बारिश की भेंट चढ़ गई थी।