बांदा। मृतक आश्रित कोटे से अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी पाना लोहे के चने चबाना जैसा है। सरकारी सेवा में कार्यरत परिवार के सदस्य को खो देने के बाद भी मृतक आश्रित को विभाग की सहानुभूति नहीं मिलती है। वह सालों-साल अपनी नियुक्ति के लिए भटकते हैं और विभागों के चक्कर लगाने को विवश हो रहे हैं। बांदा जनपद में तो ऐसे उदाहरण हैं कि मृतक आश्रित दो दशकों के बाद भी नौकरी नहीं पाए। अलबत्ता कु छेक आश्रितों को नौकरी हासिल हुई है, लेकिन यह अधिकांश चतुर्थ श्रेणी या लिपिकीय वर्ग के हैं। उन्हें उनकी योग्यता के आधार पर नौकरी मिली है।
रोडवेज में दो दशकों बाद भी नहीं हुई अनुकंपा
केस-एक
चित्रकूटधाम मंडल मुख्यालय में राज्य सड़क परिवहन निगम बांदा में अनुकंपा आधार पर नियुक्ति के 17 मामले दो दशक से लंबित हैं। इनकी फाइलें धूूल खा रहीं हैं। नियुक्ति में रोड़ा वर्ष 2001 में लागू हुआ नया प्राविधान है। अब न्यूनतम शैक्षिक योग्यता इंटरमीडिएट कर दी गई है। लंबित सभी प्रकरण चतुर्थ श्रेणी कर्मी या कंडक्टर अथवा लिपिकों के हैं। सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक परमानंद का कहना है कि अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरण झांसी स्थित क्षेत्रीय कार्यालय से संचालित होते हैं।
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पद रिक्त नहीं, तीन वर्षों से इंतजार
केस-दो
बेसिक शिक्षा विभाग में तीन मृतक आश्रित पिछले तीन वर्षों से मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। शैक्षिक योग्यता के मुताबिक लिपिक पर नियुक्ति होनी है, लेकिन कार्यालय में लिपिक का पद रिक्त नहीं है। ऐसे में तीनों आश्रित सीट रिक्त होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। वर्ष 2017 में बबेरू क्षेत्र में नियुक्त शिक्षक की सेवा काल में मृत्यु होने पर उनकी पत्नी की अब तक अनुकंपा पर नियुक्ति नहीं हुई। पत्नी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट दायर कर दी है। यहां पिछले करीब चार साल में 13 लोगों को अनुकंपा पर नियुक्ति मिली है। ये सभी चतुर्थ श्रेणीकर्मी हैं।
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दत्तक पुत्र नहीं साबित कर पा रहा आश्रित
केस-तीन
माध्यमिक शिक्षा विभाग में चतुर्थ श्रेणी पद पर अनुकंपा नियुक्ति के लिए मृतक आश्रित पिछले 10 वर्षों से कानूनी अड़ंगों से जूझ रहा है। पेच यह है कि आवेदक मृतक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का भतीजा बताया गया है। उसका दावा है कि मृतक चाचा ने उसे गोद लेकर दत्तक पुत्र के रूप में स्वीकार कर लिया था, लेकिन वह इसके साक्ष्य अभिलेख यहां जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय को उपलब्ध नहीं करा पा रहा। नतीजे में फाइल अटकी है।
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विवाहित व परित्यक्ता बेटियां भी हकदार
प्रदेश में अब विवाहित पुत्री को भी मृतक आश्रित कोटे से नियुक्ति का आधार मिल गया है। विवाहित और परित्यक्ता पुत्री को अनुकंपा आधार पर सरकारी नौकरी मिलने का रास्ता साफ हो गया है। सीएम ने हाल ही में इस प्राविधान को मंजूरी दी है। मृत सरकारी सेवकों के आश्रितों की भर्ती नियमावली-1974 के नियम-2 (ग) (3) में संशोधन हुआ है। ये हाईकोर्ट के आदेश पर किया गया है। नियमावली में पत्नी, पति, पुत्र दत्तक पुत्र अविवाहित पुत्रियां, अविवाहित दत्तक पुत्रियां, विधवा पुत्रियां, विधवा पुत्रवधुएं शामिल थीं। अब विवाहित पुत्रियों और परित्यक्ता पुत्रियां भी शामिल हो गईं हैं।
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पांच फीसदी पदों पर ही अनुकंपा नियुक्तियां
केंद्र सरकार ने नियम बना रखा है कि किसी संवर्ग में हुई रिक्तियों का केवल पांच फीसदी ही अनुकंपा आधार पर भरा जाएगा। यानि जब 95 पद पर सीधी भर्ती हो जाएगी, तब अनुकंपा वाली सिर्फ पांच भर्ती होंगी। वह भी क्रमानुसार जो पहले से प्रतीक्षारत हैं उन्हें पहले मिलेगी। जिले के कई विभागों में अनुकंपा पर नियुक्तियों की धूल खा रहीं या दौड़ रहीं फाइलें इनकी बानगी हैं।