नरैनी/करतल। गोवंशों को जंगल में छोड़ने और डेढ़ दर्जन से ज्यादा मरी व अधमरी गायों को दफनाने के मामले में एमपी पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ पशु वध, विकलांग और निरूपयोग करने की धारा और मध्य प्रदेश गोवंश प्रतिषेध अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज की है। अब मध्य प्रदेश पुलिस की जांच में बांदा के आला अधिकारियों का फंसना भी तय माना जा रहा है।
जिंदा गायों को दफन करने के प्रकरण में नरैनी नगर पंचायत ईओ अमर बहादुर सिंह के बाद शुक्रवार को शासन ने नरैनी एसडीएम सुरजीत सिंह को भी निलंबित कर दिया। आरोप है कि एसडीएम नरैनी नगर पंचायत की गोशाला से ट्रकों में गोवंश को लादते समय मौजूद थे और ट्रकों के साथ घटनास्थल एमपी की सीमा तक गए थे। हालांकि एसडीएम का कहना था कि गायों को चार गांवों में गोशाला में स्थानांतरित किया गया।
गोवंश के साथ क्रूरता का मुद्दा तूल पकड़े है। विभिन्न हिंदू संगठन बांदा से लेकर एमपी तक विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। शुक्रवार को घटनास्थल से संबंधित पहाड़ी खेरा (पन्ना) पुलिस चौकी प्रभारी को वहां के बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने तहरीर देकर दोषियों पर रिपोर्ट दर्ज करने की मांग की थी। घटनास्थल से संबंधित ब्रजपुर (पन्ना) थानाध्यक्ष बखत सिंह ने बताया कि गायों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद उच्चाधिकारियों के निर्देश पर अपने थाने में अज्ञात लोगों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कर ली है। विवेचना करके दोषियों के नाम शामिल किए जाएंगे।
एक घायल गाय की मौत, संख्या 21 पहुंची
नरैनी। मध्य प्रदेश की घाटी से यहां के गोरक्षक एक और घायल गाय को वाहन पर लादकर यहां लाए हैं। शनिवार को एक और घायल गाय की मौत हो गई। इसे मिलाकर अब तक 21 गायों की मौत हो चुकी है। गोरक्षक विनोद दीक्षित ने बताया कि एमपी के जंगल में कई गायें भटकतीं मिलीं। गोरक्षकों ने उनके लिए भूसा, पानी आदि लेकर गए थे। इनके कान में यूपी का टैग लगा हुआ है। गोरक्षकों की टीम में सोनू करवरिया, मुन्ना तिवारी, प्रदीप शर्मा, श्रवण कुमार, श्रीकांत मिश्रा आदि शामिल रहे।