इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यहां के मुख्य चिकित्साधिकारी समेत स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक (डीजी) व कई अन्य अधिकारियों को कोर्ट के आदेश का अनुपालन न करने पर नोटिस जारी करते हुए 22 जनवरी को तलब किया है।
योगेंद्र कुमार समेत 18 संविदा चालकों ने पिछले दिनों हाईकोर्ट में रिट दायर करके कहा था कि एनआरएचएम के तहत उत्तर प्रदेश एंबुलेंस सेवा में संविदा चालकों के पद पर 27 मई 2013 से 14 अगस्त 13 के बीच बांदा में सीएमओ डॉ.कैप्टन रवींद्र कुमार सिंह ने भर्ती की थी। नाम सेवा योजन कार्यालय से मंगाए थे।
सीएमओ ने 19 अप्रैल 14 को संविदा कर्मियों का नवीनीकरण करते हुए उन्हें वर्ष 2014-15 में भी पूर्ववत काम करते रहने का आदेश दिया। 5 जुलाई 2014 को इन संविदा कर्मियों को हटा दिया गया। इससे क्षुब्ध होकर उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में रिट दायर कर दी।
हाईकोर्ट की बेंच ने 14 अगस्त 2014 को इस आदेश के साथ रिट निस्तारित कर दी कि राज्य सरकार अथवा संबंधित अधिकारी सेवादाता को निर्देशित करें कि सर्वप्रथम रिट याचिका करने वाले चालकों की नियुक्ति की जाए। इनके समायोजन के बाद ही अन्य लोगों की नियुक्ति हो। हाईकोर्ट के इस आदेश को चार माह बीत गए। पर इसका पालन नहीं किया गया।
इस पर रिट दायर करने वाले संविदा चालकों ने सीएमओ सहित प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव एनआरएचएम निदेशक और स्वास्थ्य महानिदेशक को पक्षकार बनाकर उच्च न्यायालय में अवमानना रिट दायर कर दी है।
इस पर हाईकोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए सीएमओ समेत स्वास्थ्य विभाग के उपरोक्त सभी अधिकारियों को नोटिस जारी कर तलब किया है। सीएमओ को यह नोटिस प्राप्त कराने का जिम्मा सीजेएम ने कोतवाली प्रभारी को सौंपा है।