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ठंड से हो रही मौतें पर चेतावनी के खौफ से ले रहे झूठ का सहारा

Fri, 02 Jan 2015 11:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
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‘ठंड से मौत हुई तो जिला स्तरीय अधिकारी की खैर नहीं’; शासन की इस चेतावनी से सहमे अधिकारी इसे स्वीकारने से बच रहे हैं। अब तक हो चुकीं 47 मौतों में से एक में भी मौत की वजह ठंड नहीं बताई जा रही।
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इलाज या पोस्टमार्टम करने वाले जिला अस्पताल के डॉक्टर भी झंझटों से बचने को मौत की वजह ठंड नहीं कुछ और लिख रहे हैं। ठंड से मौतों का सिलसिला जारी है, लेकिन सरकारी आंकड़ों में कोई मौत दर्ज नहीं है। ठंड से होने वाली मौतों की जांच उप जिलाधिकारी व तहसीलदार स्तर पर किया जाना है।

शासन को भेजी गई 17 लोगों की रिपोर्ट में मौत की वजह ठंड नहीं बताई गई। अछाह (बबेरू) गांव में खेत में काम करते वक्त ठंड से जान गंवा बैठे पिता-पुत्र की जांच में कारण स्पष्ट नहीं किया गया। इसी तरह बरसड़ा मानपुर ग्राम प्रधान की मौत हॉर्ट अटैक से होना दर्शाया गया। दो अन्य मौतों पर शवों का बिसरा सुरक्षित किया गया है।
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25 लाख के कंबल, पांच लाख के अलाव फूंके
ठंड से गरीबों और असहायों को बचाने के लिए 25 लाख रुपये कंबल और पांच लाख रुपये अलाव को जारी किए गए, लेकिन पात्रों को इसका लाभ नहीं मिल रहा। पांचों तहसीलों में 5388 गरीबों को कंबल बांटे गए। इनमें पैलानी में 1100, अतर्रा 1110, बबेरू 1048, नरैनी 1070 व बांदा सदर में 1060 कंबल बांटे गए।

उधर, नगर पालिका परिषद ने 500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 1500 क्विंटल लकड़ी अलाव के लिए खरीदने का दावा किया है जबकि पालिका कर्मी रोजाना शाम को कुछ स्थानों पर जो लकड़ी के चंद टुकड़े डाल रहे हैं वह विलायती बबूल व अन्य जंगली पेड़ों की टहनियां हैं। ताजी और हरी होने से यह जल भी नहीं रही।
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