बांदा। टीकों के दर्द से कहला गांव में कराह रहे
बच्चों का इलाज जारी है। सोमवार को दूसरे दिन भी स्वास्थ्य विभाग की टीम ने
बच्चों को दवाएं दीं।
उधर, सीएमओ ने इस मामले की जांच के लिए दो
टीमें गठित की हैं। मानवाधिकार संगठन पीयूसीएल की टीम ने भी गांव जाकर
पीड़ित बच्चों के अभिभावकोें से जानकारी ली।
शनिवार को कहला गांव
में स्वास्थ्य विभाग की एएनएम द्वारा टीकों के बाद दुधमुंहे बच्चे बीमार
पड़ गए। उनके पैरों में सूजन आ गई और बुखार हो गया।
दर्द से रातभर
तड़पे। ‘अमर उजाला’ में खबर छपने के बाद रविवार को डॉक्टरों की टीम ने उनका
इलाज किया। दूसरे दिन भी टीम ने बच्चों को दवाएं दीं।
ग्राम
प्रधान ओम प्रकाश निषाद ने बताया कि अब बच्चों की हालत में सुधार हो रहा
है। उधर, पीयूसीएल की ओर से अधिवक्ता सैय्यद अली मंजर और शिव कुमार मिश्रा
आदि ने कहला गांव जाकर पीड़ित बच्चों के घर वालों से जानकारी दी। वे अपनी
रिपोर्ट मानवाधिकार आयोग और बार आयोग को भेजेंगे।
उधर, सीएमओ डॉ.
एके सिंह ने बताया कि दो टीमों से जांच कराई जा रही है। एक टीम ने अपनी
रिपोर्ट दे दी है। पहली टीम में अपर सीएमओ डॉ. एबी कटियार, डॉ. मेहेर और
डॉ. नीलम हैं।
दूसरी टीम में डॉ. नवीनचंद्र, डॉ. एमबी निगम और
तिंदवारी पीएचसी प्रभारी शामिल हैं। दोनों टीमों की रिपोर्ट आने के बाद
अगली कार्रवाई की जाएगी।
उधर, यह भी कहा जा रहा है कि बच्चों को ये
टीके पूरे जनपद में लगाए गए हैं, पर कहीं से ऐसी शिकायत नहीं आई। टीकाकरण
में कोई लापरवाही की गई है। बच्चों को इंजेक्शन (टीका) लगाने वालों को
प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।