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बांदाः भंवरपुर के ‘भगीरथों’ को सम्मानित करेंगे सीएम

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भांवरपुर में स्थानीय मजदूरों द्वारा श्रमदान से खोदी गई छोटी नदी में बहता पानी। - फोटो : BANDA
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बांदा। लॉकडाउन में महानगरों से लौटे प्रवासी मजदूरों की ‘भगीरथ’ की भूमिका रंग लाई है। नरैनी क्षेत्र के भंवरपुर गांव में लंबे अरसे से सूखी पड़ी घरार नदी/नाले को श्रमदान से जलधारा में बदल दिया। उनकी इस मेहनत की शोहरत मुख्यमंत्री तक पहुंच गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रवासी और गांव के मजदूरों की इस कोशिश पर काफी प्रभावित हुए हैं। उन्होंने इन मजदूरों को सम्मानित करने का निर्णय लिया है।
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करतल से बदौसा तक घरार नाले/नदी से आसपास के गांवों की पानी की जरूरत पूरी होती थी। पूरे साल पानी रहता था। कई जगह इसमें सरकारी चेकडेम भी बन गए। लेकिन सफाई और उपेक्षा से धीरे-धीरे यह पटती चली गई। पानी के स्थान पर पौधे और झाड़ियां उग आईं। हाल ही में इस गांव लौटे 50 से अधिक प्रवासी मजदूरों ने भागीरथ की भूमिका अपनाते हुए अपने हाथों में फावड़े थाम लिए। बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हुईं।
पिछले करीब एक हफ्ते से चल रही खुदाई रंग ले आई है। सूखे नाले में पानी की जलधारा बह आई है। इस दौरान मजदूर कार्यस्थल पर ही चूल्हे बनाकर अपने भोजन का इंतजाम कर रहे हैं। ‘अमर उजाला’ में 11 जून को शुरुआत में ही यह खबर फोटो सहित प्रमुखता से छपी थी। जल-जन जोड़ो अभियान के राष्ट्रीय संयोजक संजय सिंह व अनिल शर्मा ने यहां आकर काम में लगे 52 महिला-पुरुष मजदूरों को राशन की किट दी है।
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प्रदेश के अपर गृह व सूचना सचिव अवनीश कुमार अवस्थी ने लखनऊ में शुक्रवार को शाम मीडिया को बताया कि भंवरपुर के मजदूरों की इस कोशिश से मुख्यमंत्री काफी प्रभावित हुए हैं। जल्द ही वह उन्हें सम्मानित करेंगे। ग्राम पंचायत सचिव विनय कुमार सिंह ने बताया कि नाले की खुदाई में लगे मनरेगा मजदूरों को 201 रुपये प्रतिदिन मजदूरी दी जा रही है। इनमें प्रवासी मजदूर भी हैं। गुरुवार को सीडीओ, बीडीओ ने भी आकर निरीक्षण किया।
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