बांदा। गोवंश आश्रय स्थलों में मिली तमाम खामियों को लेकर मुख्य सचिव (पशुपालन) ने मंडलायुक्त व जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने आश्रय स्थलों में सुधार के निर्देश दिए हैं।
हाल ही में मुख्यमंत्री के निर्देश पर हरेक जिले में नामित नोडल अधिकारियों ने गोशालाओं की हकीकत परखी थी। दस दिवसीय निरीक्षण के बाद शासन को सत्यापन रिपोर्ट भेजी गई थी। गोशालाओं में जलभराव, गंदगी, क्षतिग्रस्त टिनशेड आदि अव्यवस्थाएं उजागर हुई थीं। नोडल अधिकारियों ने स्थायी/अस्थायी, वृहद गो संरक्षण केंद्र, कान्हा गोशाला, कांजी हाउस में व्यवस्थाएं देखी थीं।
उन्हें कीचड़ से सने गोवंश, सूखा भूखा, टूटी चरही, बाउंड्रीविहीन आश्रय स्थल मिले थे। नोडल अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट मुख्य सचिव (पशुपालन) को भेजी थी। मुख्य सचिव ने कमिश्नर व जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर नाराजगी जाहिर की है। निर्देश दिए कि बारिश में गोवंश आश्रय स्थलों में पशुओं का सही रख-रखाव व देखभाल न होने से गोवंशों की काफी हानि हो रही है।
आश्रय स्थलों में गोवंशों को बारिश से बचाने के लिए पर्याप्त इंतजाम करने, जलभराव की स्थिति पर मिट्टी डलवाने या खड़ंजा लगवाने, जल निकासी, पशुओं के बैठने के लिए टिनशेड व तिरपाल आदि व्यवस्था के निर्देश दिए हैं। संरक्षित गोवंशों को कृमिनाशक दवा अनिवार्य रूप से दी जाए। बीमार पशुओं का प्राथमिकता के साथ इलाज व साफ पीने का पानी समेत फर्श व चरही की नियमित सफाई कराने को कहा।
मच्छर/मक्खी का प्रकोप को रोकने के लिए दवाओं को छिड़काव किया जाए। संरक्षित भूसा/पशु आहार को वर्षा से बचाने, पौधरोपण, बैरिकेडिंग आदि की भी व्यवस्था हो। इसके अलावा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के पशुओं का शत-प्रतिशत टीकाकरण व चिकित्सा की व्यवस्था कराने के भी मुख्य सचिव (पशुपालन) ने निर्देश दिए हैं।
डीएपीआरओ, बीडीओ, पालिका व नगर पंचायतों के ईओ को निर्देश दिए गए कि गोवंश आश्रय स्थलों में गोवंशों को बरसात से बचाने के लिए आवश्यक प्रबंध किए जाएं। कोई भी पशु बरसात के मौसम में भूख, चिकित्सा और पानी में भीगने के कारण मरता है तो संबंधित के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
- आनंद कुमार सिंह, जिलाधिकारी