बांदा। सदर विधायक और जिला पंचायत अध्यक्ष के बीच चल रही रार के बीच जिला पंचायत सदस्यों ने बुधवार को सामूहिक इस्तीफा देने की चेतावनी दी थी। बुधवार को जिला पंचायत स्थित गेस्टहाउस में जिला पंचायत अध्यक्ष और सदस्यों के बीच गोपनीय बैठक हुई। बाहर मीडियाकर्मी उन्हें ताकते रहे। करीब एक घंटे बाद बाहर निकले अध्यक्ष और सदस्यों ने बताया कि कुछ सदस्य शामिल नहीं हो सके। इस कारण इस्तीफा देने के लिए अगली तिथि तय की जाएगी।
जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील पटेल के करीब 18 समर्थक सदस्य हैं। इन सदस्यों ने जनवरी में हुई बोर्ड बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष पर अपने क्षेत्र में ही धनराशि आवंटित करने का आरोप लगाते हुए विरोध किया था। तब से दोनों पक्ष के समर्थकों के बीच शिकायतें और जांच चल रही है। जिला पंचायत अध्यक्ष ने वर्ष 2018 से 2024 तक की जांच कराने की मांग की गई थी। इसमें कहा गया था कि तह बाजारी में सरिता द्विवेदी के कार्यकाल में करीब 120 करोड़ रुपये का घोटाला व अवैध नियुक्ति की गई हैं।
लैब की जांच में हस्ताक्षरों का भी मिलान नहीं हो रहा है। इसके बावजूद दोषियों पर कार्रवाई नहीं हो रही है। इसके विरोध में सदस्यों ने सप्ताह भर पहले सामूहिक रूप से इस्तीफा देने की चेतावनी दी थी। बुधवार को दोपहर दो बजे जिला पंचायत गेस्ट हाउस में जिला पंचायत अध्यक्ष और समर्थक जुटे और करीब डेढ़ घंटे तक गोपनीय बैठक की। मीडिया कर्मियों को अंदर नहीं जाने दिया गया। बैठक के बाद सदस्य बाहर निकले। जिला पंचायत सदस्य सीता सिंह के पति जयराम सिंह बछेउरा ने जानकारी दी की 18 सदस्यों में चार बाहर हैं। इसलिए उनके आने के बाद ही सामूहिक इस्तीफा सौंपा जाएगा।
अध्यक्ष व विधायक के बीच यहां से उपजी रार
बांदा। जिला पंचायत बोर्ड बैठक 25 जनवरी को हुई थी। बैठक शुरू होने के पहले सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी और जिला पंचायत अध्यक्ष आमने सामने आ गए थे। समर्थकों के बीच मारपीट की नौबत भी आ गई थी। यहीं से दोनों पक्षों में रार पनप गई। धीरे-धीरे यह बढ़ती गई। सदर विधायक ने जिला पंचायत अध्यक्ष पर तहबाजारी में सवा छह करोड़ रुपये घोटाले का आरोप लगाया और मंडलायुक्त सहित शासन में शिकायत की। मंडलायुक्त के आदेश पर डीएम जे.रीभा ने मामले की जांच की। करीब एक माह में जांच रिपोर्ट में सुनील पटेल सवा छह करोड़ रुपये अनियमितता के दोषी पाए गए। बताया गया कि तह बाजारी का ठेका वर्ष2024-25 में दो सौ रुपये में हुआ था। जबकि वाहनों से चार सौ रुपये के हिसाब से वसूली की गई। जो दो सौ रुपये अतिरिक्त वसूले गए,इनका कहीं कोई हिसाब किताब व लेखा-जोखा नहीं मिला। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील कुमार पटेल और सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी ने मुख्यमंत्री व अन्य कैबिनेट मंत्रियों से मुलाकात की। डीएम जे.रीभा की जांच पर सुनील पटेल ने सवाल खड़े किए। मंडलायुक्त ने इसके बाद महोबा डीएम को जांच सौंपी। इसमें भी सुनील पटेल अनियमितता के दोषी पाए गए।
उधर, जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील पटेल ने भी सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी की पत्नी सरिता द्विवेदी के जिला पंचायत अध्यक्ष रहते 120 करोड़ रुपये की अनियमितता किए जाने की शिकायत मंडलायुक्त व मुख्यमंत्री से की। इस पर समिति का गठन हुआ है, पर जांच आगे नहीं बढ़ी। इसी को लेकर जिला पंचायत अध्यक्ष और उनके समर्थक 18 सदस्यों और उधर, विधायक तथा उनके समर्थक सदस्यों के बीच शिकायतों का दौर चल रहा है।
हम लिखकर दे रहे हैं, विधायक भी हों तैयार
बांदा। जिला पंचायत स्थित अपने कार्यालय में अध्यक्ष सुनील पटेल ने पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि सदर विधायक के आगे उनकी नहीं सुनी जा रही है। अधिकारी सब उन्हीं के पक्ष में जांच और कार्रवाई कर रहे हैं। महोबा डीएम की जांच पर भी उन्होंने सवाल खड़े किए। कहा कि डीएम ने जांच की ही नहीं है। समिति से कराई है। समिति में सब विधायक के आदमी हैं। उन्होंने कहा कि जिला पंचायत में वर्ष 2018 से अब तक कराए गए कामों, नियुक्तियों और तह बाजारी की जांच शासन स्तर से नामित समिति या सीबीआई से कराई जाए। इसके लिए वह तैयार हैं। हम लिख कर दे रहे हैं, विधायक भी इसके लिए तैयार हों। उन्होंने कहा कि वह पांच साल का अपना कार्यकाल पूरा करेंगे, चाहे जितना कोई प्रयास कर ले। हम गलत नहीं हैं, जबरन गलत ठहराया जा रहा है।