फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एक साथ दफनाए गए तीनों मासूमों के शव

Mon, 30 Nov 2015 11:38 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
बांदा। नेशनल हाईवे पर भूरागढ़ बाईपास के पास शुक्रवार को तीन बच्चों की मौत का मातम अभी चिलेहटा में खत्म नहीं हुआ। उधर, बच्चों की जान लेने वाले ट्रक चालक के विरुद्ध मटौंध थाने में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। घायलों में एक बालक की हालत में सुधार न होने पर कानपुर रिफर कर दिया गया। दो अभी जिला अस्पताल में भर्ती हैं।

तीनों बच्चों के शव पोस्टमार्टम के बाद उनके परिजनों को सौंप दिए गए थे। शुक्रवार को शाम ही चिलेहटा गांव में तीनों का अंतिम संस्कार कर दिया गया। एक साथ मौत के मुंह समाए सगे भाई रवि और अरविंद दफनाए भी एक साथ गए। उन्हें एक ही गड्ढे में रखा गया। अलबत्ता तीसरे मृतक रामू की कब्र अलग बनी। एक साथ तीन मासूमों के शव उठने पर पूरे गांव में शोक था। बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल रहे।
विज्ञापन



उधर, हादसे में घायल छात्र आशीष (8) पुत्र जय प्रकाश (त्रिवेणी) की हालत में सुधार न होने पर उसे जिला अस्पताल से कानपुर रिफर कर दिया गया। चिलेहटा गांव की छात्रा प्राची (8) पुत्री सुरेंद्र और जालौन की पूजा (16) पुत्री संतोष का जिला अस्पताल में इलाज जारी है। अलबत्ता अतीक अहमद (9) पुत्र इस्माइल, राज (8) पुत्र उत्तरा, शांतनु (7) पुत्र शेरा, नैंसी (5) पुत्री अवधेश, अंश (7) व निखिल (10) पुत्र नीतेश, रोहित (14) पुत्र देवीदीन, ज्योति (10) पुत्री संतोष, प्राची (5) व काजल (10) पुत्री रामराज को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। उधर, मृतक सगे भाइयों के पिता श्यामलाल ने मटौंध थाने में ट्रक चालक के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई है। इसमें कहा गया है कि लापरवाही से ट्रक चला कर दुर्घटना अंजाम दी गई।

मतदान पर भारी पड़ा मातम
एक दिन पहले गांव के तीन बच्चों की एक साथ सड़क हादसे में मौत का मातम प्रधानी चुनाव के मतदान पर भारी रहा। मृतकों के परिजनों और नजदीकी संबंधियों ने वोट नहीं डाले। घरों में दूसरे दिन भी मासूम की मौतों पर शोक जारी रहा।

शुक्रवार को बाईपास में ट्रक की चपेट में आए आटो टेंपो सवार चिलेहटा गांव के तीन बच्चे रवि, अरविंद और रामू की मौत हो गई थी। रवि और अरविंद सगे भाई थे। शाम को पूरे गांव में शोक के माहौल के बीच तीनों बच्चों का अंतिम संस्कार किया गया। उन्हें एक खेत में दफना दिया गया।
विज्ञापन


 उधर, शनिवार को ग्राम प्रधान और सदस्य के लिए मतदान का दिन था। सुबह से ही गांव में मतदान की धमाचौकड़ी और चहल-पहल थी लेकिन मृतकों के घरों में शोक छाया रहा। मृतकों की माताओं के आंखों से आंसू नहीं थमे। पास-पड़ोसी और खानदानी भी मृतकों के घर और दरवाजे पर शोकाकुल माहौल में बैठे रहे। वोट डालने नहीं गए। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें