लगातार चौथी बार उत्तर प्रदेश विधान परिषद में निर्वाचित होकर बुंदेलखंड की राजनीति में बसपा के कद्दावर नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने सबसे लंबी मुद्दत तक ‘माननीय’ होने का तमगा हासिल किया है।
विधान सभा और विधान परिषद में उनका कार्यकाल दो दशक की सीमा पार कर गया है। इस पर यहां उनके गृह जनपद में बसपाइयों और समर्थकों में खुशियां मनाई जा रही हैं।
शुक्रवार को उत्तर प्रदेश विधान परिषद के चुनाव में सिद्दीकी लगातार चौथी बार चुनाव जीते। वह 30 जनवरी 1997 से लगातार एमएलसी हैं। इनके पूर्व 1991 में बांदा सदर सीट से विधान सभा का चुनाव जीतकर विधायक बने थे। कुल मिलाकर वह अपने जीवन के 20 बरस विधान परिषद और विधान सभा में गुजार चुके हैं।
बुंदेलखंड में किसी राजनीतिक की विधायक बने रहने की यह सबसे लंबी पारी है। बांदा शहर के बाशिंदे नसीमुद्दीन वालीबाल के अच्छे खिलाड़ी रहे हैं। नेशनल लेबल तक कई मुकाबले जीते। बाद में 1988 में बसपा में शामिल होकर खिलाड़ी से ‘राजनीतिज्ञ’ बन गए।
1991 में बसपा के टिकट पर बांदा सदर से विधान सभा चुनाव लड़ा और जीतकर विधायक बने। प्रदेश सरकार में वह चार बार काबीना मंत्री बने। 21 मार्च 1997, 21 सितंबर 1997, 13 मई 2002 और 11 मई 2007 को (चार बार) मंत्री पद की शपथ ग्रहण की। 30 जनवरी 1997 को पहली बार बसपा से विधान परिषद सदस्य चुने गए।
कार्यकाल पूरा होने पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने उन्हें दोबारा 30 जनवरी 2003 को विधान परिषद में चुनाव लड़ाया और वह चुने गए। तीसरी बार वह 30 जनवरी 2009 में एमएलसी हुए। अब लगातार चौथी बार बसपा ने उन्हें विधान परिषद में पहुंचाया है। बसपा सरकार में 2007 से 2012 तक डेढ़ दर्जन मंत्रालयों के कैबिनेट मंत्री रहे। 8 मार्च 2012 से वह विधान परिषद में नेता विरोधी दल हैं।