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दूर से सुना, अर्जी लेकर चलता किया

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तहसील दिवस पर फरियाद सुनने पहुंचे डीएम व एसपी। - फोटो : BANDA
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बांदा। लॉकडाउन के बाद पहले तहसील दिवसों में कोरोना का खौफ साफ नजर आया। गिनेचुने फरियादी ही आए। संक्रमण से सहमे अफसरों और कर्मचारियों ने दूर से ही फरियादें सुनीं। थर्मल स्क्रीनिंग के बाद ही फरियादियों को दाखिला मिला।
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सदर तहसील में एसडीएम सुधीर कुमार ने मुख्यमंत्री के आदेशों का हवाला देते हुए अफसरों को निर्देश दिए कि शिकायतों का एक सप्ताह में समाधान किया जाए। शिकायतकर्ता से संतुष्ट प्रमाण पत्र लिया जाए। कुल 31 फरियादी आए। मात्र पांच का फौरी निस्तारण हुआ। सीओ सिटी आलोक कुमार, तहसीलदार अवधेश निगम ने भी फरियादियों की शिकायतें सुनीं।
बबेरू में करीब छह माह बाद आयोजित हुए संपूर्ण समाधान दिवस में 12 विभागों के अधिकारी अनुपस्थित थे। एसडीएम सौरभ शुक्ला ने इस सभी से स्पष्टीकरण मांगा है। समाधान दिवस में सिर्फ 33 लोगों ने ही दस्तक दी। इनमें दो का ही फौरी निस्तारण हो पाया। तहसीलदार विपिन कुमार, खंड शिक्षा अधिकारी कैलाश सिंह मौजूद रहे।
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नरैनी में एसडीएम वंदिता श्रीवास्तव ने बताया कि समाधान दिवस में 37 लोगों ने अपनी शिकायतें/समस्याएं दर्ज कराई। राजस्व के तीन और विकास से संबंधित दो मामलों का निस्तारण किया गया। तहसीलदार एसके सिंह, बीडीओ मनोज सिंह, खंड शिक्षाधिकारी शिव अवतार आदि मौजूद रहे।
अतर्रा में एसडीएम जेपी यादव की अध्यक्षता में हुए संपूर्ण समाधान दिवस में पांच माह बाद 50 शिकायतें आईं। सभी शिकायतों का निस्तारण किया गया। ज्यादातर शिकायतें चकरोड में अतिक्रमण, भूमि पर कब्जा ना मिलना, पानी की समस्या रही। यहां तहसीलदार विजय प्रताप सिंह, नायब तहसीलदार कमलेश, इंस्पेक्टर दीपक पांडेय आदि मौजूद रहे।
तिंदवारी के पैलानी तहसील में समाधान दिवस पर नवागंतुक डीएम आनंद कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक डा. एसएस मीणा उपस्थित रहे। जसपुरा क्षेत्र के सिकहुला गांव में पिछले माह मनरेगा कार्यों की हुई जांच पर गजेंद्र सिंह चौहान आदि ने जिलाधिकारी से जांच रिपोर्ट में देरी की शिकायत की। इस पर डीएम ने मनरेगा उपायुक्त और खंड विकास अधिकारी से नाराजगी जताते हुए 10 दिन में जांच पूरी कर रिपोर्ट देने को कहा।
मोहन पुरवा की महिला कौसी देवी तहसील दिवस की शुरूआत पर बोली कि उसकी कृषि भूमि में दबंगों ने कब्जा कर लिया है। वह पुलिस और अफसरों के छह माह से चक्कर लगा रही है। उम्मीद जताई कि अब शायद समाधान दिवस में उसकी सुनवाई हो जाए।
किलेदार का पुरवा निवासी रेशमा ने कहा कि अधिकारियों को कोरोना का खौफ ज्यादा सता रहा है। समाधान दिवस में बिना कुछ सुने अर्जी लेकर बाहर कर दिया जाता है। वह दबंगों की शिकायत लेकर आई है। लेकिन उसे उम्मीद नहीं है कि समाधान होगा।
मोहन पुरवा के राम प्रकाश का कहना है कि सिंचाई विभाग ने नहर के लिए उसकी करीब डेढ़ बीघा जमीन अधिग्रहित कर ली है। मुआवजे के लिए वह छह माह से दौड़ रहा है। उसकी समस्या का समाधान हो तभी समाधान दिवस की सार्थकता है।
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