बांदा/करतल। हाईटेक सुरक्षा व्यवस्था और मध्य प्रदेश वन विभाग के अफसरों और कर्मियों की बड़ी जमात के बाद भी पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत और शिकार की घटनाएं थम नहीं रहीं। इस वर्ष की शुरुआत में पार्क के सभी बाघों को जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) से लैस किया गया है। जीपीएस कालर बाघों की हर पल की लोकेशन और गतिविधियां रिजर्व पार्क के
अधिकारियों और कर्मचारियों को पहुंचाता रहता है। सवाल उठता है कि बाघ हफ्ते-दस दिन से गायब था और किसी अधिकारी, कर्मचारी ने इस पर ध्यान नहीं दिया। मर चुके बाघ की लोकेशन और उसकी गतिविधियां पार्क प्रबंधन को पता क्यों नहीं चल पाईं? फिलहाल पार्क प्रबंधन ने यह भी स्पष्ट नहीं किया है कि कंकाल में जीपीएस कॉलर था या नहीं।
गुरुवार को जो कंकाल मिला है, उसमें सिर और पैर नहीं था। आशंका है कि बाघ का शिकार हुआ है। पिछले माह नवंबर में पन्ना टाइगर की तीन वर्षीय बाघिन (पी-213) की मौत हो गई थी। यह मौत भी अमानगंज बफर बीट के रमपुरा में हुई थी। पार्क प्रबंधन ने शिकार की बात से पल्ला झाड़ लिया था। बाघिन की मौत को प्रथम दृष्टया स्वभाविक बताया गया। एक माह के अंतराल में और दो बाघों की मौत हुई।