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चार डॉक्टर समेत 10 का वेतन रोका

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बांदा। डीएम समेत कई अफसरों की टीमों ने मंगलवार को राजकीय आयुर्वेद अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण में डॉक्टर से लेकर कर्मचारियों तक की लापरवाही सामने आई। डीएम ने चार डॉक्टर और छह कर्मचारियों का एक दिन का वेतन रोक दिया है।
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डीएम अनुराग पटेल ने मंडी समिति परिसर स्थित राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय का निरीक्षण किया। स्टॉक रजिस्टर से मिलान पर आयुष रक्षा की छह किट अधिक पाई गईं। आयुष क्वाथ के 15 डिब्बे कम मिले और चूरन दो किलो ज्यादा मिला। फार्मासिस्ट राजेंद्र बाबू कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए।
डीएम ने उनका और अनुपस्थित स्वीपर सुनील कुमार का एक दिन का वेतन रोक दिया। गूलरनाका स्थित चार बेड के राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में भी डीएम पहुंचे। यहां फार्मासिस्ट बिंदा प्रसाद अनुपस्थित मिले। स्टॉक रजिस्टर से 56 आयुष रक्षा किट ज्यादा मिलीं। स्टोर रूम में फर्नीचर टूटा मिला। इस पर डीएम ने प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ.राजेश कुमार राजपूत का एक दिन का वेतन रोक दिया।
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उधर, सिटी मजिस्ट्रेट केशवनाथ गुप्ता ने राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय पल्हरी का निरीक्षण किया। यहां चिकित्साधिकारी के कक्ष में रखे दवाओं के डिब्बे (गत्ते) पर सर्प बैठा मिला। इससे अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। उप जिलाधिकारियों, तहसीलदारों और विकास अधिकारी ने भी जनपद के विभिन्न आयुर्वेदिक अस्पतालों का निरीक्षण किया। गिरवां राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल में डॉ.ऊषा अहिरवार, बदौसा में डॉ.बृजेश कुमार त्रिपाठी, पलरा में डॉ.सोनू रजक और चिल्ला में डॉ.परितोष उमराव अनुपस्थित मिले। हरदौली में फार्मासिस्ट नजरुद्दीन, पतौरा में वाहन चालक राजेश कुमार, गोयरा मुगली में उमाशंकर कुशवाहा अनुपस्थित पाए गए। इन सभी का डीएम ने एक दिन का वेतन रोक दिया है।
तीन प्रभारी चिकित्साधिकारियों का वेतन रोका
बांदा। कोविड-19 के वैक्सीनेशन में लापरवाही सामने आने पर डीएम अनुराग पटेल ने तीन प्रभारी चिकित्साधिकारियों का नवंबर माह का वेतन रोक दिया है। साथ ही चेतावनी दी है कि इस माह वैक्सीनेशन के लक्ष्य में सुधार न हुआ तो उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। डीएम ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र महुआ के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ.देव तिवारी, कमासिन के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ.जितेंद्र सिंह और बिसंडा के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ.उमेश कुमार का वेतन रोकने की कार्रवाई की है। डीएम ने कहा कि समीक्षा बैठकों में वह लगातार टीकाकरण लक्ष्य पूरा करने के निर्देश देते रहे हैं। इसके बाद भी सुधार नहीं हो रहा है। यह उदासीनता है।
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