बांदा। केन नदी किनारे आबाद गांवों से नदी में हो रहे प्रदूषण को रोकने के लिए इन गांवों के ग्रामीणों को नए साल की पहली शाम नदी किनारे ही %अलाव पे चौपाल’ लगाकर प्रेरित किया गया। सामूहिक खिचड़ी भोज भी हुआ। 22 गांवों में हुई चौपालों में 42 अधिकारी शामिल हुए।
डीएम हीरा लाल ने इस बाबत जारी पत्र में कहा कि केन नदी जनपद की जीवनदायिनी है। इससे पेयजल आपूर्ति भी होती है। नदी किनारे आबाद गांव के लोग इसे कई तरह से नुकसान पहुंचा रहे हैं। लिहाजा नव वर्ष पर इन्हीं गांवों में अलाव पे चौपाल लगाकर ग्रामीणों को खिचड़ी भोज कराया जाए और उन्हें नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए प्रेरित कर प्रतिज्ञा कराई जाए।
इसके लिए डीएम ने गांव वार दो-दो अधिकारियों की ड्यूटी लगाई। यह सब अधिकारी सूर्यास्त से पहले ही अपने आवंटित गांवों में पहुंच गए। लेखपालों ने अलाव की व्यवस्था की। सूर्यास्त के बाद शाम 6 बजे अलाव पर खिचड़ी भोज के साथ अधिकारियों ने ग्रामीणों को नदी की सुरक्षा और संरक्षण का संकल्प दिलाया।
चौपाल वाले गांवों में बांदा तहसील के ब्रम्हाडेरा, चटगन, मरौली, काशीपुर, हटेटीपुरवा, पथरी और गोड़ी बाबा। नरैनी तहसील में बिल्हरका, बरसड़ा मानपुर, लहुरेटा, गौर शिवपुर, मऊ, स्योढ़ा, काजीपुर तथा गोविंदपुर। पैलानी तहसील में खप्टिहा कलां, सांड़ी, पैलानी, सिंधन कलां, सिंधन खुर्द, तारा और रेहुंटा गांव शामिल हैं। चौपालों और खिचड़ी भोज में सीडीओ, एडीएम, सभी उप जिलाधिकारी, कृषि अधिकारी, डीडीओ, आबकारी अधिकारी, बीएसए, डीपीआरओ, ईओ, उपायुक्त मनरेगा, क्रीड़ाधिकारी, एक्सईएन केन कैनाल, पीडब्ल्यूडी व सिंचाई, सहायक निदेशक बचत आदि शामिल रहे।