बांदा। सरकारी अनुदान पर बनने वाले व्यक्तिगत शौचालयों की जांच अब परिषदीय स्कूलों के शिक्षक करेंगे। ग्राम पंचायत सचिव भी मौजूद रहेंगे।
शौचालय निर्माण के लिए अनुदान राशि लाभार्थियों के खातों में भेजने के बजाए लाभार्थियों के हिस्से की पूरी धनराशि ग्राम पंचायत के खाते में भेजी जाती रही। नतीजे में ग्राम प्रधानों व सचिवों ने शौचालय निर्माण में जमकर मनमानी की। लाभार्थियों की सूची डीपीआरओ कार्यालय को उपलब्ध नहीं कराई। सबसे लंबा खेल बीपीएल परिवारों के घर शौचालय बनाने में हुआ। इन्हें प्रत्येक शौचालय निर्माण पर वर्ष 2009-10 में 2200 रुपए अनुदान मिलता था। बाद में अंबेडकर गांवों में बीपीएल लाभार्थियों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि बढ़ाकर 4540 रुपए कर दी गई। जिले में अब तक एक लाख 10 हजार व्यक्तिगत शौचालय बनाने का दावा किया गया है।
जिलाधिकारी शीतल वर्मा ने डीपीआरओ को पत्र भेजकर कहा है कि ग्राम पंचायत अधिकारियों से सभी बीपीएल व एपीएल शौचालय लाभार्थियों की सूची तैयार कराएं। प्रत्येक ग्राम पंचायत में दो-दो शिक्षक लाभार्थियों का सत्यापन करेंगे। ग्राम पंचायत सचिव को भी शिक्षकों के साथ सत्यापन के समय मौजूद रहने के आदेश दिए गए हैं। शासनादेश के मुताबिक धनराशि दुरुपयोग पाए जाने वाली ग्राम पंचायतों के प्रधान व पंचायत सचिव के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के साथ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।