बेंदाघाट (बांदा)। ‘अच्छे दिन आने वाले हैं’। मोदी सरकार का यह नारा अभी तक किसी के लिए भले ही सटीक न बैठा हो लेकिन पाक जेल में बंद भारत के 151 कैदियों के लिए सच साबित हुआ। पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की भारत आमद के पूर्व पाकिस्तान की जेल से रिहा हुए कैदियों में 4 बंदी बांदा जनपद के हैं। चारों बंदियों के घरों में जश्न का माहौल है। डेढ़ साल बाद मिली रिहाई की खुशी में चारों युवक पाक जेल में मिली यातनाएं भी भूल गए।
पाकिस्तान की नारा (हैदराबाद) जेल से रिहा हुए तिंदवारी क्षेत्र के बेंदा गांव निवासी सुरेंद्र सिंह पुत्र सुखदेव सिंह, जगदीश उर्फ जुगनू पुत्र जागेश्वर वर्मा, छोटू पुत्र कल्लू वर्मा और बांदा शहर के छाबी ताला निवासी मनोज पुत्र पन्नेलाल वर्मा के दिलो-दिमाग में पाक जेल में मिली यातनाएं ताजी हैं। इन लोगों ने बताया मजदूरी पर मछली का शिकार करने करीब हर साल ओखा (गुजरात) जाते हैं। करीब 6 माह में उनकी अच्छी खासी कमाई हो जाती है। 2 फरवरी 2013 को समुंदर में शिकार करते समय पाकिस्तानी नौसेना के जवानों ने उन्हें दबोच लिया। उन पर आरोप था कि वह पाकिस्तान की सीमा में आ गए हैं। उनकी जमकर पिटाई की गई। एक दिन नौसैनिकों ने अपने कब्जे में रखने के बाद पाक पुलिस के हवाले कर दिया। कराची थाने में पुलिस ने भी पिटाई की। अगले दिन लांदी जेल भेज दिया गया। सुरेंद्र सिंह व जगदीश ने बताया कि जेल में उन्हें दो दिन और दो रात सोने नहीं दिया गया। बाद में जेल प्रशासन ने उनकी बैरक बदलकर भारतीय बंदियों के साथ रख दिया। इस बैरक की क्षमता 20 से 25 लोगों की थी। लेकिन वहां जानवरों की तरह 70 से 80 कैदी भरे जाते थे। दिन-रात काम लिया जाता था। जेल अधिकारी जानवर जैसा सुलूक करते थे। मामूली गलती पर बेरहमी से पीटा जाता था।
जेल में खाने के नाम पर दो अधपकी और केमिकल युक्त रोटी और पानी जैसी पतली दाल मिलती थी। कई बार पाक बंदियों ने उन्हें पीटा। जेल अधिकारियों ने कोई सुनवाई नहीं की। 11 माह 15 दिन लांदी जेल से रखने के बाद उन्हें हैदराबाद (पाकिस्तान) की नारा जेल स्थानांतरित कर दिया। करीब डेढ़ साल बाद उन्हें पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की भारत आमद के पूर्व पाकिस्तान की जेल से रिहा कर दिया। उस दिन उनके साथ नारा जेल से कुल 151 कैदी रिहा हुए थे। इनमें ज्यादातर गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार और यूपी के थे।
पाक जेलों में अभी भी बंद है बांदा 18 युवक
बेंदाघाट (बांदा)। जिले के 18 युवक अभी भी पिछले डेढ़ साल से पाकिस्तान की करांची स्थित लांदी और हैदराबाद की नारा जेल में कैद हैं। इनका जुर्म सिर्फ इतना था कि मजदूरी पर मछली का शिकार करने के दौरान समुंदर में यह पाक सीमा में दाखिल हो गए थे। जेल में बंद युवकों की सलामती के लिए दुआएं हो रही हैं।
बबेरू निवासी रजुवा खान, फूल खान, रोहित वर्मा, मनोहर वर्मा तथा तिंदवारी क्षेत्र के विश्राम (माटा), मिरचइयां (धौसड़) और छोटी (जसईपुर) समेत 18 भारतीय पिछले डेढ़ साल से पाकिस्तान के करांची की लांदी जेल में बंद हैं। यह तीनों ओखा (गुजरात) में मजदूरी के लिए गए थे। वहां इसी वर्ष फरवरी माह में एक मछली ठेकेदार के यहां मजदूरी करने लगे। ठेकेदार उनसे मछली का शिकार कराता था। शिकार के दौरान समुंदर में सभी अनजाने में पाक सीमा में दाखिल हो गए। पाकिस्तानी नौसैनिकों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। अदालत में पेश करने के बाद जेल भेज दिया। इसकी भनक यहां गांव में रह रहे परिजनों को नहीं लगी। 8 माह पूर्व सभी के पाक जेल में बंद होने की जानकारी परिजनों को पत्र मिलने पर हुई।
सुरेंद्र सिंह, जगदीश, छोटू और मनोज की रिहाई के बाद पाक जेल में बंद 18 युवकों के परिजनों में भी रिहाई की किरण जागी है। जेल में बंद युवकों के परिजनों की रात की नींद उड़ी हुई है। रोजाना ईश्वर से उनकी रिहाई और सलामती की दुआ मांग रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर सभी की रिहाई की मांग की है। उनका कहना है कि वह न तो बड़े अफसरों या नेताओं तक पहुंच रखते हैं न उनके पास दौड़-धूप के लिए पैसा है। नाराजगी जताई कि पाक सैनिक अक्सर मछली का शिकार करने वाले भारतीयों को पकड़ ले जाते हैं। भारतीय नौसैनिक कोई जवाबी कार्रवाई नहीं करते। तीनों बंदियों के परिवार खेतीहर मजदूरी करके अपना बसर कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने की अगवानी, पत्नियों ने आरती उतारी
बेंदाघाट। पाकिस्तान की जेल से रिहा होने के बाद गांव पहुंचे युवकों का ग्रामीणों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। सभी ने उन्हें हाथों हाथ लिया। गले लगाया और बैंडबाजों के साथ उन्हें फूल-माला पहनाई। रोली, टीका भी लगाया। घर पहुंचते ही इंतजार कर रही सुरेंद्र सिंह की पत्नी तारावती, जगदीश की पत्नी सावित्री और छोटू की पत्नी गीता ने पतियों की आरती उतारी। युवकों ने शक्ति पीठ काली देवी मंदिर में पूजा-अर्चना की।
50 रुपये में गुलामी करते थे पाक जेल कर्मी
बेंदाघाट। पाकिस्तान की जेल में कई वर्ष गुजार कर आए सुरेंद्र सिंह व जगदीश ने बताया कि पाक जेल में भी भ्रष्टाचार चरम पर है। जेल अधिकारी बंदियों के हक का राशन गायब कर देते हैं। जेल में दाखिल होते ही उनके पैसे आदि छीन लिए गए। किसी भी बंदीरक्षक को कोई कैदी 50 रुपये पकड़ा दे तो वह उसकी गुलामी करने को तैयार हो जाता था। छोटू ने बताया कि फुर्सत के क्षणों में पाकिस्तान जेल में बंद कुछ गुजराती बंदियों से मोतियों को पिरोकर सजावटी सामान बनाने का हुनर सीखा। इसी हुनर के बल पर ब्रेसलेट, नाव, लैंप आदि बनाकर कमाई करते थे।
यहां परिवार ने झेली भुखमरी
बेंदाघाट। घर के मुखिया के पाकिस्तान जेल में कैद हो जाने से यहां उनकी पत्नियों और परिवार पर मुसीबत का पहाड़ टूट पड़ा। उनके मुखिया के न रहने से एक-एक रोटी के लाले पड़ गए। लेकिन पड़ोसियों और ग्राम प्रधान ने उन्हें मदद देकर जिंदा रखा। सुरेंद्र सिंह की पत्नी तारावती बताती हैं कि मुखिया के न रहने से घर की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई। बच्चों को पालन-पोषण की जिम्मेदारी संभालते हुए गांव के काली देवी मंदिर के पास चाय-नाश्ते की दुकान खोली। ग्राम प्रधान विवेक सिंह ने मनरेगा जाब कार्ड बना दिया। वह मजदूरों को पानी पिलाती थी। मजदूरी और दुकान से होने वाली आमदनी से घर की आर्थिक स्थिति सुधरने लगी। जगदीश की पत्नी सावित्री ने बताया कि पति के जेल में बंद होने से परिवार ने काफी तकलीफें उठाईं। शुरू के 8 माह तक तो उन्हें यह पता ही नहीं रहा कि उसके पति पाकिस्तान की जेल में हैं। पाकिस्तान जेल से चिट्ठी आई तो पता चला। ग्राम प्रधान ने जाब कार्ड जारी करते हुए खंती खुदाई में लगा दिया। इसके अलावा वह फसल कटाई करके परिवार को पाला पोसा।
गुजरात सरकार देती है आर्थिक मदद
बेंदाघाट। पाक जेल से रिहा हुए छोटू ने बताया कि पाकिस्तान की जेलों में बंद गुजराती मछुआरों के आश्रितों को गुजरात सरकार हर माह 4500 रुपये देती है। यह मदद जब तक दी जाती है जब तक वह रिहा नहीं हो जाता। जबकि यूपी सरकार पाक जेल में बंद कैदियों की धेला भर की मदद नहीं देती। बताया कि उसकी बैरक में गुजराती मूल के करीब आधा दर्जन बंदियों को गुजरात सरकार की ओर से हर भरण-पोषण के लिए 4500 रुपये हर माह मिलते हैं।
मोटर बोट चालक डालते हैं खतरे में
बेंदाघाट। मोटर बोट चालक ज्यादा कमाई के चक्कर में भारतीय मछुआरों की जान जोखिम में डालने से नहीं चूकते हैं। पाक सीमा जानते हुए भी मोटरबोट को समुद्री सीमा से पार ले जाते हैं, जबकि मछुआरे इस बात से अनजान रहते हैं कि वह लोग जहां मछली का शिकार कर रहे हैं वह पाक सीमा है। पाक जेल से रिहा हुए सुरेंद्र सिंह व जगदीश वर्मा ने बताया कि मोटरबोट बीटीएस सिस्टम से लैस होती है। बोट चालक को बीटीएस सिस्टम से यह पता चलता रहता है कि भारतीय सीमा कहां तक है। लेकिन ज्यादा कमाई के चक्कर में जानबूझकर मछुआरों को पाकिस्तान की सीमा में घुसपैठ कराई जाती है। वजह यह है कि अधिक मात्रा में मछली का शिकार करने पर मोटर बोट चालक को अतिरिक्त बोनस मिलता है। वहीं मजदूरों को जोखिम के सिवा कुछ नहीं मिलता।
मोदी की मेहरबानी से हुई रिहाई
बेंदाघाट। उनकी रिहाई में मोदी की मेहरबानी है। भाजपा प्रत्याशियों की जीत पर रिहा होने की आस बंधी थी। उपरोक्त बातें पाक जेल से रिहा हुए सुरेंद्र सिंह, जगदीश वर्मा, छोटू और मनोज ने ‘अमर उजाला’ से कहीं। बताया कि बैरक में लगी टीवी पर उन्होंने भाजपा की जीत की खबर देखी थी। पूरा दिन बैरक से बाहर नहीं निकले। टीवी स्क्रीन पर ही चिपके रहे। इधर मोदी सरकार बनाने की ओर बढ़ रहे थे तो वे सभी भारतीय बंदी बैरक में एक-दूसरे से गले मिलकर जीत का गुपचुप जश्न मनाते रहे। मोदी सरकार गठन के बाद उन्हें अपनी रिहाई की पूरी उम्मीद थी। बताया कि मोदी सरकार का खौफ पाक में है।