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खनिज से भर रहा खजाना, फिर भी बुंदेलखंड बेगाना

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पिछड़ेपन, आर्थिक तंगहाली जैसे अभिशापों से जूझ रहा बुंदेलखंड अपने दामन में समेटे खनिज संपदा से हर साल सरकार की झोली में 10 अरब रुपये से ज्यादा डालता है।
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फिर भी यहां रोजी-रोटी के लाले हैं। खनिज के खनन में भागीदारी तो दरकिनार यहां के लोगों को मजदूरी भी नहीं मिलती। बुंदेलखंड के हर जिले में भरी पड़ी खनिज संपदा से सरकार और बाहरी लोग मालामाल हो रहे हैं। ‘मियां की जूती, मियां का सिर’ तर्ज पर बुंदेली कंगाल हो रहे हैं। 16 संसदीय चुनावों में कोई इसका पुरसाहाल नहीं रहा है। अबकी भी चुनाव से यह मुद्दा नदारद है।


बुंदेलखंड के सातों जिलों में खनिज संपदा की भरमार है। बालू, मौरंग, पत्थर, ग्रेनाइट इत्यादि खनिज भरे पड़े हैं। साल दर साल सरकार इनकी रॉयल्टी और ठेकों से अरबों रुपये वसूल रही है।
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हर साल इसमें बढ़ोत्तरी का सिलसिला चल रहा है। पर्यावरण को जबरदस्त नुकसान हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट, एनजीटी और हाईकोर्ट कई बार इस पर कड़ा रुख अपना चुके हैं।

कार्रवाइयां भी की हैं, लेकिन खनिज के खेल में लगभग शत-प्रतिशत राजनीतिक लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े होने से इस पर कोई लगाम नहीं लग पा रही।

पिछले करीब डेढ़ दशक से यह धंधा और फलाफूला है। अब इसमें देश की बड़ी कंपनियों ने भी हाथ डाल दिया है। अनेकों बालू की बड़ी खदानें बाहरी कंपनियों ने ठेके पर हथिया ली हैं।

बालू के भाव 10 गुना तक ज्यादा हो चुके हैैं। खनिज विभाग ई-पट्टे देकर निर्धारित रॉयल्टी से कई गुना ज्यादा वसूल रहा है। सिर्फ चित्रकूटधाम मंडल में ही खनिज से मिलने वाले राजस्व का आंकड़ा सालाना 10 अरब रुपये से ज्यादा पहुंच चुका है। अधिकांश खदानें सत्तारूढ़ और अन्य राजनीतिक दलों के माननीय दूसरे नामों से हथियाए हुए हैं।


दूसरी तरफ बुंदेलखंड के मजदूर रोजी और मजदूरी की तलाश में भारी संख्या में महानगरों को पलायन कर गए हैं। बालू माफिया उन्हें खदानों में काम नहीं दे रहे।

खनन से लेकर लोडिंग तक मशीनें कर रही हैं। स्थानीय मजदूरों का हक मारने में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खदानें चला रहे राजनीतिक दल शामिल हैं। ऐसे में खनिज संपदा, अवैध खनन, मजदूरी और पलायन चुनाव के मुद्दे कैसे बन सकते हैं?


बुंदेलखंड में खनिज संपदा से सरकारी खजाने की आमदनी सिर्फ 10 साल में ही परवान चढ़ गई। सरकार के राजस्व में 10 गुना का इजाफा हुआ। दूसरी तरफ इस धंधे में संलिप्त लोग दिन दूना रात चौगुना की रफ्तार से धनपति बने। बमुश्किल 10 वर्ष पहले बुंदेलखंड से सरकार को खनिज राजस्व एक अरब भी नहीं मिलता था। अब यह 10 अरब से ज्यादा हो गया है।
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