बांदा। चित्रकूटधाम मंडल के 10 हजार से अधिक मनरेगा श्रमिकों का 60 लाख से अधिक का भुगतान अटका है। उधर, निर्माण सामग्री की करीब 42 लाख की उधारी पड़ी होने से दो सौ ग्रामपंचायतों में कच्चे-पक्के काम ठप हो गए हैं। मजदूरी न मिलने से लगभग 25 हजार मजदूरों ने मनरेगा के फावड़ों से दूरी बना ली है।
कोरोना काल में महानगरों से लौटे करीब 50 हजार से अधिक प्रवासी मजदूरों को मनरेगा से रोजगार दिया गया था। उनसे तालाब खुदाई, बरसाती पानी की निकासी, चक व संपर्क मार्ग निर्माण, मेड़बंदी, समतलीकरण सहित पीएम, सीएम आवासों में कार्य कराए गए। कोरोना कम होने पर 15 हजार से अधिक मजदूर फिर महानगरों को चले गए। मार्च माह में चित्रकूटधाम मंडल के चारों जनपदों में 35 हजार मजदूर काम कर रहे थे। इसके बाद उन्हें मजदूरी का भुगतान नहीं मिला।
उनका करीब 60 लाख रुपये बकाया है। दूसरी तरफ निर्माण सामग्री की करीब 42 लाख उधारी है। ऐसे में निर्माण कार्यों में ब्रेक के साथ मजदूरों की संख्या घटती जा रही है। मौजूदा समय मजदूरों की संख्या मात्र 10 हजार रह गई।
160 ग्राम पंचायतों में निर्माण बंद
चित्रकूटधाम मंडल के 160 ग्राम पंचायतों में काम बंद चल रहे हैं। बांदा की 469 में 55, हमीरपुर की 330 में 35, चित्रकूट की 331 में 40, महोबा की 273 में 30 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जहां पर मनरेगा के कार्य पूरी तरह ठप हैं। मौजूदा समय में बांदा में 2894, महोबा में 1921, हमीरपुर में 1,900, चित्रकूट में 2,222 मजदूरों के काम पर लगे होने का दावा किया गया है।
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निर्माण सामग्री व मजदूरी का नहीं मिला बजट
मनरेगा के कुल बजट का 40 फीसदी निर्माण सामग्री मद में आवंटित होता है। तीन माह से कोई बजट नहीं मिला है। ऐसे में खरीदी गई बालू, गिट्टी, पत्थर, सीमेंट, सरिया, टाइल्स आदि का करीब 42 लाख रुपये बकाया है। बांदा में 17 लाख, महोबा में नौ लाख, चित्रकूट में 11 लाख और हमीरपुर में 9.99 लाख बकाया है। इसी प्रकार मजदूरों का बांदा में 35 लाख, चित्रकूट में 17 लाख, महोबा में आठ लाख और हमीरपुर में करीब 10 लाख रुपये तीन माह का बकाया है।
तीन माह से बजट न मिल पाने से मनरेगा की मजदूरी और निर्माण सामग्री का भुगतान नहीं हो पा रहा है। निदेेशालय ने एक-दो दिन में बजट उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। - राघवेंद्र तिवारी
उपायुक्त मनरेगा, बांदा