बांदा। फसल अवशेष जलाने वाली 42 ग्राम पंचायतों को चिह्नित किया गया है। जिन पर जहां अधिकारी पैनी नजर रखे हैं वहीं सेटेलाइट से भी निगरानी की जा रही है।
उप निदेशक कृषि अभय यादव ने बताया कि फसल अवशेष जलाने से हवा प्रदूषित व जहरीली हो जाती है। मृदा में लाभकारी जीवाणु की संख्या भी कम हो जाती है। सांस के मरीज बढ़ने लगते हैं जो इसके रोगी हैं वह परेशान हो जाते हैं। घटनाओं को रोकने के लिए अपर जिलाधिकारी (वित्त/राजस्व) की अध्यक्षता में सेल का गठन किया गया है। जिसमें अपर एसपी, सीओ, उप जिलाधिकारी, सचल दस्ते में शामिल हैं।
कहा कि फसल अवशेष जलाने वाले जिले की 42 ग्राम पंचायतों फतपुरवा, दोहा, जारी, जौरही, बढ़ेहा, कुरैली, सुरौली, छनेहरालालपुर, करबई, बिसंडा, कोर्रही, बछौधा, तेंदुरा, फुफंंदी, ओरन, अरमार, बाकल, भभुवा, पिंडारन गुजेनी, करहुली, मवई, समगरा, मझिला, पाराबन्नुबेगल, किटहाई, खप्टिहाकला, पलरा, पिपरगवा, मुगुंस आदि को चिह्नित किया गया है।
इन ग्राम पंचायतों में नजर रखी जा रही है। सेटेलाइट से भी निगरानी की जा रही है। दो एकड़ से कम क्षेत्र में घटना घटित होने पर 2500, पांच एकड़ के लिए पांच हजार एवं 5 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फसल अवशेष जलाने पर 15 हजार जुर्माना किया जाएगा।