सेटेलाइट डाटा एनालिसिस में सामने आए चिंताजनक हालात, भौतिक सत्यापन के निर्देश
बारिश के पानी को तालाबों तक पहुंचने के लिए नहीं की गई नाला या नाली की व्यवस्था
जल संरक्षण में जिले को मिल चुका राष्ट्रीय पुरस्कार, हकीकत में अधिकतर तालाब बदहाल
संदीप तिवारी
बांदा। बरसात के मौसम में भी जिले के 37 अमृत सरोवर प्यासे हैं। झमाझम बारिश के बावजूद इन सरोवरों में पानी नहीं है। दो साल में ये तालाब किसी भी मौसम में पानी से नहीं भरे। केंद्र सरकार की तकनीकी टीम ने सेटेलाइट डाटा एनालिसिस किया तो यह हालात सामने आए। इसके बाद भौतिक सत्यापन के निर्देश दिए गए हैं।
केंद्रीय मंत्रालय ने पत्र भेजकर ग्राम विकास आयुक्त के जरिए डीसी मनरेगा से सरोवरों का भौतिक सत्यापन कराने का निर्देश दिया है। पता लगाने के लिए कहा है कि जिस मौसम में नदियों से लेकर ताल-तलैया तक पानी से लबालब हैं वैसे मौसम में अमृत सरोवर सूखे क्यों हैं?
वहीं, जानकारों का मानना है कि तालाब को बनाने में डिजाइन का ध्यान नहीं रखा गया है। तालाबों में बारिश का पानी कहां से आएगा और अधिक पानी होने पर किधर से निकलेगा इसकी व्यवस्था नहीं की गई है। यही वजह है कि बरसात के मौसम में भी तालाबों में पानी नहीं है। बनाने वाले नाली या नाला बनाना ही भूल गए।
बता दें कि बारिश के पानी को सरोवरों में सहेजकर भूगर्भ जलस्तर बढ़ाने के लिए जिले में अब तक 5000 से अधिक नए सरोवर खोदे गए या उनका जीर्णोद्धार कराया गया है। वर्ष 2024 में देश का पांचवां राष्ट्रीय जल संरक्षण पुरस्कार-2023 बांदा को मिल चुका है। अब एक हकीकत यह सामने आई है कि बरसात के मौसम में भी ज्यादातर तालाब सूखे हैं। संवाद
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बनिया तालाब का 2.80 लाख से हुआ था जीर्णोद्धार तिंदवारी
ग्राम पंचायत मुंगुस के 3,698 हेक्टेयर के बनिया तालाब को वर्ष 2022-23 में अमृत सरोवर के रूप में चयनित कर 2.80 लाख की लागत से जीर्णोद्धार कराया गया था, लेकिन तालाब बदहाल पड़ा है। पथ-वे व लोगों के बैठने के लिए लगीं कुर्सियां व डिस्प्ले बोर्ड टूटे पड़े हैं। तालाब में नाममात्र का पानी है। तालाब को कंटीली झाड़ियां घेरे हुए हैं।
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गांधी तालाब की डिजाइन में खामी से नहीं भर सका
खत्री पहाड : बरईमानपुर-शेरपुर के गांधी तालाब को वर्ष 2022-23 में अमृत सरोवर के रूप में चयनित किया गया था। मनरेगा व ग्राम पंचायत ने 15वें वित्त की राशि से तालाब का जीर्णोद्धार कराया। रख-रखाव व डिजाइन में खामियों के चलते तालाब आज तक पानी से नहीं भरा। तालाब को जाने वाली सीढ़ियां,पथवे, बैठने की कुर्सी टूटी हैं।
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4.50 लाख से कौडिया तालाब की बदली थी सूरत
अतर्रा: ग्राम पंचायत नाई कौडिया तालाब को वर्ष 2022-23 में अमृत सरोवर के रूप में चयनित किया गया था। मनरेगा व ग्राम पंचायत ने 4.50 हजार खर्च कर इसे नया रूप दिया। तालाब में एक बूंद पानी नहीं है। घाट बना नहीं है। बैठने के लिए कुर्सियां नहीं हैं। डिस्प्ले बोर्ड टूटा पड़ा है। प्रधान मेवालाल कहते हैं कि सचिव को व्यवस्थाओं को दुरूस्त करने का कहा है।
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3.50 लाख खर्च पर कुम्हरियां डेरा तालाब खुद प्यासा
जसपुरा: ग्राम पंचायत गौरीकला के कुम्हरियां डेरा तालाब को वर्ष 2022-23 में अमृत सरोवर के रूप में चयनित किया गया था। मनरेगा व ग्राम पंचायत ने करीब साढ़े तीन लाख रुपये खर्च करके तालाब का जीर्णोद्धार कराया। तालाब में पानी नहीं है। घाट भी नहीं बने हैं। तालाब बदहाल पड़ा है। तालाब में पानी आने व जाने के लिए कोई नाली नहीं बनाई गई।
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जीर्णोद्धार के बाद भी बदहाल है साड़ी का बड़ा तालाब
पैलानी: साडी गांव के बड़े तालाब को वर्ष 2022-23 में अमृत सरोवर के रूप में चयनित किया गया था। मनरेगा व ग्राम पंचायत ने करीब साढ़े तीन लाख रुपये खर्च करके तालाब का जीर्णोद्धार कराया। बारिश के बावजूद तालाब में पानी नहीं है। घाट व लोगों के बैठने के लिए बनी सीमेंट की कुर्सियां टूटी पड़ी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि तालाब में पानी आने का रास्ता नहीं है।
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पानी कैसे एकत्र होगा ध्यान नहीं दिया
जल संरक्षण के क्षेत्र में काम कर रहे समाजसेवी पुष्पेंद्र भाई का कहना है कि तालाब तो खोद दिए गए, लेकिन डिजाइन व ले-आउट में कमी रह गई। इस वजह से बारिश का पानी तालाबों में एकत्र नहीं हो रहा है। गांव में एकत्र होने वाले बारिश के पानी को तालाब में पहुंचाने के लिए नाली या नाला बनाना चाहिए था। तभी बारिश का पानी तालाब तक पहुंचता।
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अमृत सरोवरों की सुंदरता पर ध्यान रहा
समाजसेवी प्रेम सिंह का कहना है कि तालाब खोद देने से कुछ नहीं होने वाला है। तालाब को खोदते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि इसमें पानी कहां से कैसे आएगा? अमृत सरोवरों में अफसरों ने सुंदरता पर ज्यादा ध्यान दिया। तालाब के मैनेजमेंट को लेकर ध्यान नहीं दिया। यही वजह है कि झमाझम बारिश के बावजूद भी तालाबों में पानी नहीं एकत्र हो रहा है।
तालाब में पानी क्यों नहीं है इसकी वजह जानने के लिए खंड विकास अधिकारियों के माध्यम से सत्यापन कराया जाएगा। जो कमियां होंगी उन्हें दुरूस्त कराया जाएगा। दोषियों पर कार्रवाई होगी।
- अजय कुमार पांडेय, मुख्य विकास अधिकारी
तिंदवारी के मुगुंस गांव में सूखा पड़ा अमृत सरोवर।
तिंदवारी के मुगुंस गांव में सूखा पड़ा अमृत सरोवर।
तिंदवारी के मुगुंस गांव में सूखा पड़ा अमृत सरोवर।
तिंदवारी के मुगुंस गांव में सूखा पड़ा अमृत सरोवर।
तिंदवारी के मुगुंस गांव में सूखा पड़ा अमृत सरोवर।
तिंदवारी के मुगुंस गांव में सूखा पड़ा अमृत सरोवर।