इस्लामी कलेंडर के शाबान माह की 15वीं रात को मनाई जाने वाली शबे बरात शनिवार (20 अप्रैल) को मनाई जाएगी। शुक्रवार को पूर्व संध्या पर मजारों और कब्रिस्तानों की सफाई करके उन्हें रंगरोगन और बिजली की रोशनी से जगमग कर जश्ने चिरागा किया गया।
शब-ए-बरात पर अकीदतमंद मुस्लिम घरानों में विशेष प्रकार के हलुवा बनाए जाते हैं।
अपने पूर्वजों की याद में फातेहा ख्वानी होती है। इस रात को काफी अहम बताया गया है। रातभर लोग जागकर इबादत करते हैं। आल इंडिया काजी बोर्ड के नायब सदर मौलाना सैय्यद मुमताज रब्बानी ने कहा कि इस रात इबादत करने वालों के गुनाह माफ होते हैं।
साथ ही अगले पूरे साल में होने वाली मौत और जन्म के फैसले होते हैं। यहां तक कि हर इंसान का पूरा बजट तय कर दिया जाता है। बताया कि पैगंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद का एक दांत उहद की जंग में शहीद हो गया था।
यह खबर सुनकर उनके अनुयायी उवैस करनी जो उनसे काफी दूर थे, ने नबी की मोहब्बत और अकीदत में अपने सभी दांत तोड़ लिए थे। यह दिन शबे बरात का था। उन्हें खाने के लिए पतला हलुवा दिया जाता था। इसीलिए शबे बरात में हलुवे की फातेहा होती है।
मौलाना मुमताज रब्बानी ने कहा कि शबे बरात पर कब्रों और मजारों पर जाकर सलाम और फातेहा पेश करना सुन्नत है। लेकिन औरतों का कब्रों पर जाना सख्त गुनाह है। जो औरतें कब्रों पर जाती हैं उन पर लानत पड़ती है।
औरतों को चाहिए घर में ही फातेहा पढ़ें। यह भी कहा कि कब्रों से हरे घास और पेड़ नहीं हटाना चाहिए। जिस कब्र में हरियाली होती है उसमें दफन मुर्दे के अजाब में कमी होती है।
मौलाना मुमताज ने यह भी कहा है कि कब्रों के ऊपर अगरबत्ती या आग न जलाएं। सिर्फ खुशबू के लिए इत्र का इस्तेमाल करें। अगरबत्ती जलाएं तो कब्र से दूर जलाएं। कब्रों पर फातेहा पढ़ें।