माहे रमजान की 27वीं शब (रात) इबादतों से गुजारी गई। यह रात शबे कद्र कहलाती है। मस्जिदों से लेकर घरों तक और बच्चों से लेकर बूढ़ों तक ने पूरी रात इबादत और तिलावत में बिताई। तकरीरों और सामूहिक नमाजों का सिलसिला चलता रहा।
शनिवार को सूरज ढलने के साथ ही 27वीं शब शुरू हो गई। तरावीह की नमाज के बाद रोजदार व अन्य लोगों ने मस्जिदों या घरों में इबादतें शुरू कर दीं। नवाबी जामा मस्जिद, शेख सरवर साहब मस्जिद, छावनी की मस्जिद, छिपटहरी की मदीना मस्जिद, मर्दन नाका मस्जिद, ऊंट मोहाल मस्जिद, कोतवाली रोड मरकज मस्जिद, बोड़ा मस्जिद, अमानिया मस्जिद, हाथी खाना मस्जिद, रब्बानिया मस्जिद आदि में इबादतें, तकरीरें और नातें होती रहीं।
मुख्यालय से 16 किलोमीटर दूर मदरसा जामिया हथौरा में नाजिम मौलाना हाफिज कारी हबीब अहमद ने तरावीह के दौरान कुरान पूरा किया। यहां बड़ी संख्या में लोग एतिकाफ पर भी बैठे हैं। तरावीह के बाद सलातोसलाम और नातें हुईं। मौलाना हबीब अहमद और मौलाना मुशर्रत हुसैन ने रमजान और शबे कद्र की खूबियां बयां कीं। रातभर इबादत हुई। बड़ी तादाद में विभिन्न शहरों से भी लोग आए हुए थे। मौलाना नजीब अहमद, मौलाना हसीब अहमद, मौलाना अनीस आदि ने सभी की मेहमान नवाजी की।