बांदा। दुनियाभर में कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के बढ़ते संक्रमण से विशेषज्ञों ने महामारी की तीसरी लहर की प्रबल आशंका जताई है। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग में तैयारियां पुराने ढर्रे पर ही हैं। गांव, कस्बों की तो बात दरकिनार मंडल मुख्यालय स्थित अस्पताल में 200 बेड तो लगा दिए गए, लेकिन इलाज में बेहद सहयोगी माने जानेवाले पैरा मेडिकल स्टाफ की कमी पूरी नहीं की गई। तीसरी लहर प्रभावी हुई तो इलाज में दिक्कतें खड़ी हो सकती हैं।
जिला अस्पताल परिसर में 200 बेड के मंडलीय अस्पताल को पूरी तरह कोविड-19 के लिए आरक्षित कर दिया गया है। यहां पीडियाट्रिक इन्टेंसिव केयर यूनिट (पीकू) में आईसीयू के लिए 11 बेड, हाई डिपेंडेंसी यूनिट (एचडीयू) के लिए 32 बेड और आइसोलेशन वार्ड में 35 बेड लगाए गए हैं।
बच्चों के अलावा अन्य कोरोना मरीजों के लिए आईसीयू व ओमिक्रॉन के 10-10 और आइसोलेशन के लिए 39 बेड आरक्षित हैं। स्वास्थ्य विभाग सिर्फ बेड लगाकर ही तैयारी को बेहतर माने हैं। जबकि स्टाफ तैनाती की स्थिति यह है कि जहां 30 पैरा मेडिकल स्टाफ होना चाहिए, वहां मात्र पांच कार्यरत हैं।
इनमें फार्मासिस्ट के चार पदों में से एक, 10 वार्ड ब्वाय में दो, 10 वार्ड आया में एक व छह स्टाफ नर्स में मात्र एक कार्यरत है। स्वीपर के सभी 10 पद खाली हैं। ऐेसे में अस्पताल की सफाई व्यवस्था का बखूबी अनुमान लगाया जा सकता है। उधर, दवाएं पर्याप्त होने का दावा किया जा रहा है, फिर भी डाक्टर मरीजों को बाहर की दवाएं लिख रहे हैं।
शासन के निर्देश पर कोरोना से निपटने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। पैरा मेडिकल स्टाफ और स्वीपर पद पर संविदा या आउटसोर्सिंग से नियुक्ति के लिए महानिदेशक (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं) को पत्र भेजा है। अनुमति मिलते ही भर्ती की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। मानक के मुताबिक डाक्टर कार्यरत हैं। दवाएं भी पर्याप्त हैं। डा.एसएन मिश्र, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला व मंडलीय अस्पताल, बांदा।
चार दिन से पेट दर्द की शिकायत होने पर जिला अस्पताल की ओपीडी (वाह्य रोगी विभाग) में फिजीशियन को दिखाया। कुछ दवाएं तो अस्पताल से मिल गईं, लेकिन कई दवाएं लगभग 500 रुपये की बाहर से खरीदनी पड़ी।- रामआसरे (चहितारा)