बांदा। जिले में खाद्य वस्तुओं की हजारों छोटी-बड़ी दुकानें हैं, लेकिन खाद्य सुरक्षा विभाग में सिर्फ 1562 ही पंजीकृत हैं। इनमें 353 दुकानें 12 लाख तक का कारोबार कर सकती हैं। इससे ऊपर टर्नओवर का किसी भी दुकानदार के पास लाइसेंस नहीं है।
स्थानीय निकाय के अभिलेखों में जिले में करीब 7000 से ज्यादा खाद्य वस्तुओं की दुकानें हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग में इन दुकानों का 50 फीसदी भी रजिस्ट्रेशन नहीं है। खाद्य वस्तुओं की दर्जनों दुकानें ऐसी हैं, जिनका करोड़ों में टर्न ओवर है, लेकिन इनमें से किसी भी कारोबारी ने वास्तविक टर्नओवर को दर्शाकर रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है।
इसी प्रकार दुग्ध डेयरी और दूधियों की संख्या भी दो हजार के करीब है। जो गांव से दूध लाकर शहर में बेचते हैं, लेकिन पंजीयन सिर्फ 200 डेयरी और दूधियों का है। जिले में सैकड़ों खाद्य वस्तुओं की दुकानें बिना पंजीयन के चल रही हैं। उनका लाखों का टर्नओवर है, लेकिन विभाग इनकी ओर से नजरें घुमाए है। कभी कभार जांच-पड़ताल और छापे व चालान की रस्म अदायगी कर दी जाती है।
90 फीसदी दुकानों का पंजीयन किया जा चुका है। जो दुकानें बची हैं, जल्द ही अभियान चलाकर उनका भी पंजीयन किया जाएगा। कोई भी दुकान बिना पंजीयन के संचालित नहीं होगी। -अजीत कुमार, अभिहित अधिकारी, बांदा।
646 दवा की दुकानें रजिस्टर्ड
जिले में सिर्फ 646 दवा की दुकानें ही फुटकर व थोक दवा व्यवसाय के लिए औषधि प्रशासन विभाग में रजिस्टर्ड हैं। अधिकांश दुकानों (मेडिकल स्टोर) में दवा बिक्री के साथ इलाज भी होता है। खाद्य एवं औषधि विभाग अधिकारियों को कहना है कि जहां पर इलाज के साथ दवा बिक्री हो रही है, उन पर कार्रवाई का प्रावधान स्वास्थ्य विभाग का है। उनकी मदद से ही वह कोई भी कार्रवाई कर सकते हैं।