फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नौनिहालों के कंधे से कम होगा बस्ते का बोझ

विज्ञापन
विज्ञापन
बांदा। सीबीएसई बोर्ड ने अब नौनिहालों से बस्ते का बोझ कम कर दिया है। पहली और दूसरी कक्षा के बच्चों को न होमवर्क मिलेगा और न ही उनके कंधों या हाथों में बस्ता नजर आएगा।
विज्ञापन


तीसरी से 8वीं कक्षा तक सिर्फ चार किताबों से पढ़ाई होगी। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (सीबीएसई) ने इसके लिए सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को आदेश जारी कर दिए हैं।

नौनिहालों के कंधों पर बस्तों के भारी बोझ का मुद्दा कई वर्षों से छाया हुआ है। अभिभावकों से लेकर संगठन तक इसका विरोध करते रहे हैं। बस्ते के बोझ से एक तरफ जहां बच्चों की सेहत पर असर पड़ रहा है तो दूसरी तरफ अभिभावकों की जेब खाली हो रही है।
विज्ञापन


पिछले माह 29 जुलाई 2018 को जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद मद्रास हाईकोर्ट ने सीबीएसई को बस्तों का बोझ कम करने के आदेश दिए थे। इसी के बाद सीबीएसई ने अपने कोर्स में बदलाव शुरू किया है। कोर्ट के आदेश के बाद केंद्रीय बोर्ड ने कवायद शुरू कर दी है। सीबीएसई बोर्ड के निदेशक ने सभी प्रधानाचार्यों को पत्र जारी कर आदेश दिए हैं कि बोर्ड के स्कूलों में पहली व दूसरी कक्षा में नो-बस्ता, नो-होमवर्क व्यवस्था लागू करें।

जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरके गुप्ता का कहना है कि बच्चों पर बस्ते का अधिक बोझ डालने से पीठ और रीढ़ में दर्द व अन्य रोग पैदा होने का खतरा रहता है। ज्यादा वजन लेकर चलने से हड्डियों और शारीरिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

उधर, अभिभावक और अधिवक्ता कृष्ण पाल सिंह चौहान, डॉ. मनोज गुप्ता, व्यापारी नेता मनोज जैन आदि ने सीबीएसई के स्कूलों में किताबी बोझ कम करने को लेकर खुशी जाहिर की है। कहा कि फीस व वाहन शुल्क में भी कमी होना चाहिए। उधर, इस मुद्दे पर लंबे अरसे से आरटीआई सूचनाएं संकलित कर बस्तों का बोझ कम करने की जद्दोजेहद करते रहे स्वतंत्र कुमार रावत ने कहा कि यह आदेश बहुत पहले हो जाना चाहिए था। देर आए, दुरुस्त आए।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें